राजदीप सरदेसाईने पुनः दिखाई अपनी ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’
०३ अगस्त, २०२१
समाचार ‘चैनल’ ‘इंडिया टुडे’के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाईने पुनः अपनी ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ दिखाई है । ‘यूट्यूब’के ‘चैनल’ ‘लल्लनटॉप’पर साक्षात्कारके मध्य सम्पादक सौरभ द्विवेदी उनसे ‘नेतानगरी’ नामक कार्यक्रममें ममता बनर्जीकी देहली यात्राके विषयमें चर्चा कर रहे थे । इसी मध्य सौरभ द्विवेदीने राजदीपसे प्रश्न पूछा कि बंगालमें जिस प्रकार चुनावके पश्चात हिंसा हो रही थी व भाजपा कार्यकर्ताओंको ‘टीएमसी’के कार्यकर्ताओंद्वारा प्रकट रूपसे लक्ष्य बनाया जा रहा था, इस विषयमें उन्होंने ममता बनर्जीके साथ कोई चर्चा की ? जिसपर राजदीपने कहा कि वह ममताके साथ ‘चायपर चर्चा’के लिए गए थे और उन्होंने केवल यह पूछा कि बंगालमें हिंसासे आपकी छविको कोई क्षति पहुंची है क्या ? जिसपर ममताने त्वरित उत्तर देते हुए कहा यह कहना अनुचित है कि सम्पूर्ण प्रकरण उनके कारण हुआ है, उन्होंने तो ‘टीएमसी’के ‘कैडर’को शान्त बने रहनेके निर्देश दिए थे । वहीं राजदीपने यह भी कहा कि मैं आपको आश्वासन देता हूं कि यदि यह ‘टीवी’ साक्षात्कार होता तो मैं इसका सीधा उत्तर देता । ममता बनर्जी विजयी होकर आई थी, मैं उनके अभिनन्दन हेतु गया था । यदि मैं इस प्रकारका प्रश्न पूछता, तो मुझे रसगुल्ला नहीं मिलता । उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व २ मई २०२१ को बंगाल चुनावकी ‘कवरेज’के मध्य राजदीपने टिप्पणीकी थी कि ‘टीएमसी’की विजयपर ‘कांग्रेस’को रसगुल्लेकी ‘ट्रीट’ देनी चाहिए ।
इस वक्तव्यमें ‘रसगुल्ले’का अर्थ बहुत कुछ निकाला जा सकता है, जिसके लिए आजके पत्रकार जाने जाते हैं, तभी तो वे किसी न किसी नेताकी चाटुकारिता करते हैं । चाटुकारिताको त्याग पत्रकारिता करनेवाले पत्रकारोंका इस देशमें अत्यधिक अभाव है । ऐसे पत्रकारोंके कारण ही पत्रकारितासे लोगोंका विश्वास उठ गया है । ऐसे लोग पत्रकारिताके योग्य नहीं हो सकते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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