आतंकी धनसे बनीं मस्जिदों व मदरसोंपरके विरुद्घ कार्यवाही करनेको सज्ज शासन, ‘एनआइए’ने आरम्भकी जांच !


फरवरी ९, २०१९

 

आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’की मस्जिदों और मदरसोंके वित्तपोषणके (फंडिंगके) आरोपियोंके विरुद्घ प्रवर्तन निदेशालयने (ईडी) ‘मनी लांड्रिंग रोकथाम’ विधान अन्तर्गत जांच आरम्भ की है । ‘ईडी’की जांच आरम्भ होनेके पश्चात आतंकी धनसे बने मदरसों और मस्जिदोंकी सम्पत्तिको अधिकृत करनेका रास्ता स्पष्ट हो गया है ।

‘ईडी’के एक वरिष्ठ अधिकारीने कहा कि ‘मनी लांड्रिंग रोकथाम’ विधानके अनुसार ‘ईडी’को अवैध धनसे बनाई गई किसी भी सम्पत्तिको अधिकृत करनेका अधिकार है । वास्तवमें, गत वर्ष सितम्बरमें ‘एनआइए’ने देशकी राजधानी देहलीमें चल रहे ‘लश्कर-ए-तैयबा’के आतंकी पोषितके माड्यूल’को उजागर करते हुए तीन आरोपियोंको बन्दी बनाया था । बन्दी आरोपियोंसे पूछताछके समय ज्ञात हुआ था कि आतंकी वित्तपोषणका यह जाल केवल कश्मीरमें आतंकियोंको धन उपलब्ध करानेतक सीमित नहीं है, वरन लश्कर-ए-तैयबा मस्जिदों और मदरसोंकेद्वारा देशमें कट्टरता प्रसारित करनेका भी षडयन्त्र कर रहा है ।

आतंकी वित्तपोषणके लिए बन्दी बनाया मुहम्मद सलमान हरियाणाके पलवल जनपदके एक गांवकी मस्जिदका इमाम भी है । पूछताछमें सलमानने स्वीकार किया कि आतंकी वित्तपोषणके धनका प्रयोग उसने मस्जिद और मदरसा बनानेमें किया था । इसके पश्चात ‘एनआइए’ने मस्जिदका अन्वेषण किया और कई लिखितपत्र भी अधिकृत किए थे ।

लश्कर-ए-तैयबा मुखिया और मुंबई आक्रमणका आरोपी हाफिज सईद ‘फलाह-ए-इंसानियत’के माध्यमसे आतंकी वित्तपोषण कर रहा था । ‘फलाह-ए-इंसानियत’ भी लश्करका प्रतिरूप संगठन है और संयुक्त राष्ट्रने इसे आतंकी संगठन घोषित कर रखा है । जांच विभागकी दृष्टिसे बचनेके लिए आतंकी वित्तपोषणकेद्वारा दुबईमें रहनेवाले ‘फलाह-ए-इंसानियत’से जुडे एक पाकिस्तानीका प्रयोग किया जाता था । यह पाकिस्तानी एक ओर निजामुद्दीनमें रहनेवाले मुहम्मद सलमानको हवाला व अन्य माध्यमोंसे लाखों रुपये भेजता और साथ ही वह पाकिस्तान स्थित ‘फलाह-ए-इंसानियत’के उपाध्यक्षके (डिप्टी चीफके) साथ निरन्तर सम्पर्कमें था । ‘एनआइए’ने मुहम्मद सलमानके साथ हवाला संचालक दरियागंजके मुहम्मद सलीम और श्रीनगरके अब्दुल राशिदको बन्दी बनाया था ।

 

“लम्बे समयसे समस्त राष्ट्रवादियोंको जिस पगकी अपेक्षा थी, वह देरीसे ही सही, परन्तु कार्यान्वित हो रहा है, जो उचित दिशामें उठाया गया पग है ! मस्जिदें और मदरसे आतंकके धनद्वारा विषका प्रसार करते हैं, इस सत्यको आज विश्वके सभी राष्ट्र जानते हैं और कार्यवाही कर रहे हैं । भारतको भी अब यथाशीघ्र और कडी कार्यवाहीकी आवश्यकता है; क्योंकि सबसे बडी विडम्बना है कि यहां कुछ दलोंके राजनेता स्वयं आतंकके पोषक हैं, जो भारतके लिए संकट है । सत्ता परिवर्तन होनेकी स्थितिमें ये आतंक समर्थक कुछ कार्यवाही होने देंगें, इसकी आशा अल्प ही है; अतः मोदी शासनसे यथाशीघ्र कार्यवाही अपेक्षित है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जागरण

 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution