ईश्वरसे छल करनेवाली स्त्रियां नरकगामी है !


आजकी कुछ मूढ महिलाएं अयप्पा मन्दिरमें अपनी बाह्य वेशभूषा परिवर्तितकर जाती हैं और उन्हें लगता है कि वे ऐसाकर स्त्री जातिके उद्धारका कार्य कर रही हैं ! भगवानके सामने छल करनेवाली स्त्रियां, अपने लिए नरकका द्वार खोलती हैं, ऐसे लोग समाजके किसी भी वर्गका उद्धार कभी नहीं कर सकते हैं !
    जो भगवानके साथ छल करेंं, जो धर्म विरुद्ध आचरण करें, जो समाजमें उच्छृंखलता निर्माण करें, वे तो स्त्री जातिके नामपर कलंकके रूपमें इतिहासमें घृणासे स्मरण की जाएंगींं ! वे समाज उद्धारक कैसे हो सकती हैं ? स्त्री तो धर्मकी प्रतीक होती है । जो स्त्रियां, पिता, पुत्र, पति आदि सभीको धर्मके मार्गकी ओर सन्मुख करती हैं, वे ही हमारी संस्कृतिमें आदरकी पात्र होती हैंं ! शूर्पनखाने अपने भाईयोंको श्रीराम और लक्ष्मणजीके विरुद्ध भडकाया था, क्या हम उन्हें आदरसे स्मरण करते हैं ?
  वैदिक सनातन धर्ममें, धर्म अधिष्ठित नियम स्त्रीको प्रताडित करने हेतु नहीं, अपितु उसके कल्याण एवं रक्षणकी भावनासे बनाया गया है, यह सभी स्त्रियोंने सदैव स्मरण रखना चाहिए !



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution