दिसम्बर ३१, २०१८
राष्ट्रीय जांच विभागकी (एनआईए) ओरसे पकडे गए इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ‘मॉड्यूल’के संदिग्ध आतंकियोंके लक्ष्यपर ‘एनआईए’ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके (आरएसएस) अधिकारी थे । विभागके अनुसार आरोपियोंने देहलीमें स्थित ‘आरएसएस’के कार्यालयकी ‘रेकी’ की थी, जिससे आक्रमण ढंगसे किया जा सके ।
‘एनआईए’ने कहा है कि मुख्य आरोपी सुहैलने दीवालीके दिन अपने बमका परीक्षण किया था, जिससे उसकी तैयारीपर किसीको शंका न हो । यही नहीं आरोपियोंने ये योजना बनाई थी कि वो प्रत्येक आक्रमणके पश्चात घटना स्थलपर ‘आईएसआईएस’का ध्वज छोडकर आएंगे, जिससे ‘आईएसआईएस’का भय बनाया जा सके !!
एनआईएने जब कार्यवाही की तो छापेमें सम्मिलित सभी दलोंके साथ कमांडो यूनिटको भेज था और छापेमें सम्मिलित सभी अधिकारियों और सैनिकोंको ‘बुलेट प्रूफ जैकेट’ और हेलमेट उपलब्ध कराए थे । अभी ‘एनआईए’ उनसे पूछताछमें उनसे ये ज्ञात कर रही है कि उन्होंने शस्त्र कहांसे लिए ?
बता दें कि एनआईए और देहली पुलिस विशेष विभाग ‘आईएसआईएस मॉड्यूल’के सम्बन्धमें छापेमारी कर रही है । रविवार, ३१ दिसम्बरको एनआईएने बडी कार्यवाही की है । दलने रविवारको उत्तरप्रदेशके अमरोहामें छापा मारा था । यहांसे ‘हरकत उल हर्ब ए इस्लाम’ संगठनके पांच संदिग्ध लोग बन्दी बनाए गए थे । इन पांचोंकी आयु २०-२२ वर्ष है । इनके पास ‘आइएस’के विज्ञापन पुस्तिका (पैम्पलेट) मिली हैं ।
“स्पष्ट है कि अब शासनको तुष्टिकरण नीतिका त्यागकर राष्ट्रीय सुरक्षाको महत्व देना होगा और मदरसों, मौलवियों, जो आए दिन राष्ट्रविरोधी होनेके साक्ष्य देते हैं, उनपर कार्यवाहीकर राष्ट्रकी सुरक्षा सुनिश्चित करें, अन्यथा राष्ट्रपर विपत्ति आनेमें समय नहीं लगेगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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