अप्रैल २२, २०१९
इस्लामिक देश बांग्लादेशकी प्रधानमन्त्री शेख हसीनाने स्पष्ट कर दिया है कि रोहिंग्याओंको उनका देश छोडकर अपने मूल देश वापस लौटना ही होगा । शेख हसीनाने यह बात ‘यूएई’की ‘स्टेट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन’की मन्त्री राइम इब्राहिमसे भेंटके समय कही । हसीनाने ‘यूएई’की मन्त्रीको रोहिंग्या राज्यके प्रकरणमें संक्षिप्त विवरण दिया और कहा कि कई अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओंके साथ बांग्लादेश शासन रोहिंग्या शरणार्थियोंकी सहायता कर रही है; परन्तु रोहिंग्याओंको अपने देश लौटना ही होगा ।
हसीनाने कहा कि म्यांमार और बांग्लादेशके मध्य इसपर चर्चा जारी है और हमने प्रत्यर्पणकी सन्धिपर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं; परन्तु प्रत्यर्पण प्रक्रियाका आरम्भ होना अभी शेष है । शेख हसीनाने कहा कि बांग्लादेश शासन रोहिंग्या शरणार्थियोंको उत्तम सुविधाओंके साथ अस्थायी शिविरोंके निर्माणके लिए एक द्वीप विकसित कर रही है; परन्तु अब यह असम्भव है तथा रोहिंग्याओंको अपने देश वापस लौटना ही होगा !
“एक ओर सुरक्षा विभागकी चेतावनीके पश्चात भी आजके तथाकथित बुद्धिजीवी और धर्मनिरपेक्ष रोहिंग्याओंको भारतमें रखनेकी पैरवी कर रहे हैं, जबकि ये देशकी सुरक्षाके लिए संकट सिद्ध हो चुके हैं । जब बांग्लादेश ऐसा साहस कर सकता है तो भारत क्यों नहीं ? स्वार्थी राजनीति ही इसका एकमात्र कारण है । भारतके सत्ताके कुछ लालची दलों व नेताओंने रोहिंग्याओंको पहचान-पत्र दिलवाकर यहांका स्थायी निवासी बना दिया है, जिससे अब वे भी यहांका होनेका दम भरते हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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