मई ११, २०१९
दुर्दान्त आतंकवादी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ने भयभीत करनेवाला दावा किया है । ‘आईएस’ने कहा कि वह भारतमें प्रथम बार ‘प्रांत’ स्थापित करनेमें सफल हो गया है !! समाचार विभाग ‘रॉयटर्स’के अनुसार सुरक्षाबलों और आतंकवादियोंके मध्य कश्मीरमें मुठभेडके पश्चात यह दावा किया गया है । इस मुठभेडमें एक आतंकवादी मारा गया, जिसका सम्बन्ध इसी गुटसे था ।
‘आईएस एमाक’ समाचार विभागने शुक्रवार, १० मईको नूतन प्रांतका नाम ‘विलायाह ऑफ हिंद’ बताया ! वक्तव्यमें दावा किया गया कि कश्मीरके शोपियां जनपदके अमशीपोरामें आईएसने भारतीय सैनिकोंको मार दिया; परन्तु एक पुलिस प्रवक्ताने इस दावेका खण्डन किया । यद्यपि आईएसने माना कि शुक्रवारको इश्फाक अहमद सोफी नामक आतंकवादी मारा गया ।
नूतन प्रांतकी स्थापनाका ‘आईएस’का दावा इसके पुनः खडे होने जैसा प्रतित होता है । अप्रैलमें इराक और सीरियासे आईएसका खलीफा राज समाप्त हो गया था, जहां एक समय सहस्रों मीलके क्षेत्रमें उसका शासन चलता था । इसके पश्चात व्यथित ‘आईएस’ने आत्मघाती आक्रमणोंको तीव्र कर दिया । कुछ दिवस पूर्व ही उसने श्रीलंकामें कई स्थानपर बम विस्फोट किए !
इस्लामिक आतंकवादियोंपर दृष्टि रखनेवाले ‘साइट इंटेल ग्रुप’की संचालिका रीटा काट्जने कहा, ”ऐसे क्षेत्रमें ‘प्रांत’की स्थापना, जहां वास्तविक प्रशासन जैसा कुछ नहीं है, बेतुका ही है; परन्तु इसे हलकेमें नहीं लिया जाना चाहिए ।” उन्होंने कहा, “विश्व इन चीजोंपर नेत्र मूंद सकता है; परन्तु इन दुर्बल क्षेत्रोंमें जिहादियोंके लिए ये आईएस ‘खलीफा’के मानचित्रके पुनर्निर्माणमें भूमिगत स्तरपर सहायता करनेके लिए आवश्यक संकेत हैं !”
मारा गया आतंकी सोफी एक दशकसे अधिक कश्मीरमें कई आतंकी संगठनोंके साथ कार्य कर रहा था । बादमें वह ‘इस्लामिक स्टेट’में सम्मिलित हो गया । यह जानकारी शनिवारको एक सैन्य अधिकारीने दी । इसके अतिरिक्त ‘आईएस’से सहानुभूति रखनेवाली श्रीनगरकी एक पत्रिकाको भी सोफीने साक्षात्कार दिया था । सूत्रोंके अनुसार घाटीमें सुरक्षाबलों, पुलिस और सेनापर कई ग्रेनेड विस्फोटमें उसका हाथ था ।
सैन्य अधिकारीने कहा, सम्भव है कि कश्मीरमें सोफी एकमात्र आतंकी ही था, जो ‘आईएस’से जुडा था । कई दशकोंसे कश्मीरमें आतंकी सुरक्षाबलोंसे लड रहे हैं; परन्तु वह ‘इस्लामिक स्टेट’की भांति नहीं हैं, जो विश्वपर खलीफा राज बनाना चाहता है ।
“अब हमें इसपर और सतर्क होने व इस्लामिक संस्थानोंपर और अधिक कठोर कार्यवाहीकी आवश्यकता है; अन्यथा कहीं हमें श्रीलंकाकी भांति ही न भोगना पडे ! परिस्थिति आनेसे पूर्व उसका निवारण ढूंढ लेना है ही योग्य शासनका प्रतीत है; अतः भारत शासन इसपर गम्भीर हो !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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