नवम्बर २९, २०१८
शिरडीमें द्वारिकामाईके निकट लगे दो भगवा साइनबोर्डपर विवाद हो गया है । स्थानीय और मुसलमान समुदायके कुछ लोगोंके प्रदर्शनके पश्चात इन बोर्डको हटा दिया गया है । उल्लेखनीय है कि ‘द्वारिकामाई मस्जिद’ वाले पटको हटाकर ‘द्वारिकामाई मन्दिर’ वाले पट (बोर्ड) लगा दिए गए थे । मुसलमानोंने मांग की है कि इन भगवा बोर्ड और ध्वजको भी आठ दिवसके भीतर हटाया जाए ! एक अंग्रेजी जालस्थलके अनुसार प्रदर्शनकारियोंने आरोप लगाया है कि ‘साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट’का भगवाकरण हो रहा है । साईंके ध्वजमें ‘ऊं’ शब्द व ‘ऊं साईं नाथाय नमः’ने प्रकरण और भडका दिया !
मुसलमानोंका कहना है कि जबसे कुछ नूतन सदस्योंने समितिका कार्यभार सम्भाला, तबसे इसका भगवाकरण किया जा रहा है । इस प्रकरणमें संस्थानके संचालकके पास एक परिवाद भेजी गई, जिसमें धर्मस्थलमें कुछ परिवर्तन किए गए हैं, ताकि इसे एक विशेष धर्मसे जोडकर दिखाया जा सकें ।
उल्लेखनीय है कि मन्दीरमें पूजा सदैव हिन्दू प्रथाके अनुसार होती है ।
“एक खरे सन्तकी स्थलीको ‘द्वारिकामाई मस्जिद’ बना दिया गया और अब धर्मान्धोंको वहां ‘ऊँ’ और अन्य प्रतिकोंसे भी परेशानी है, क्या कुछ समय पश्चात इसका भी इस्लामीकरण कर मस्जिद बनानेकी योजना है ? क्या इसी तथाकथित ‘गंगा-जमुनी संस्कृति’की बातें धर्मान्ध करते हैं ? सभी हिन्दू इसपर विचार करें । और मानव भी विचीत्र व स्वार्थी प्राणी है कि सन्तके सन्देश ‘श्रद्धा व सबुरी’को तो छोडकर शेष सब करता है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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