‘एजेएल’से हुई आयको लेकर आयकर विभागका सोनिया-राहुलको १०० कोटिका नोटिस !!


जनवरी ९,२०१९

आयकर विभागने मंगलवार, ८ जनवरीको उच्चतम न्यायालयमें बताया कि ‘असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ प्रकरणमें सोनिया गांधी और राहुल गांधीके २०११-१२ के आयकरको पुनः निर्धारित करनेका आदेश दिया है । यद्यपि, विभागने बताया कि आदेशपर अभी कार्यवाही नहीं हुई है । आयकर विभागके पुनर्मूल्यांकन आदेशके पश्चात सोनिया और राहुलपर लगभग १०० कोटि रुपयोंका आयकर शेष है !

आयकर विभागने मंगलवारको उच्चतम न्यायालयको सूचित किया कि ‘नैशनल हेरल्ड’ प्रकरणमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधीके २०११-१२ के कर प्रकरणमें निर्धारण सम्बन्धी आदेश पारित किया गया है; परन्तु इसपर कार्यवाही नहीं की गई है । न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम. आर. शाहकी पीठने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी और अन्यके प्रकरणमें कर मांग सम्बन्धी ३१ दिसम्बर, २०१८ का निर्धारण आदेश ब्यौरेमें प्रस्तुत करनेको कहा ।


पीठने कहा कि इसके आधारपर वह प्रकरणके गुणदोषपर कोई राय नहीं बनाएंगें । पीठने सोनिया गांधी और राहुल गांधीको एक याचिका प्रविष्ट करने और ३१ दिसम्बर २०१८ के जारी ‘सीबीडीटी’का एक परिपत्र ४ सप्ताहके भीतर प्रस्तुत करनेका निर्देश दिया, जिसमें सम्पत्तिके मूल्यांकनपर करोंके बारेमें स्पष्टीकरण दिया गया था; परन्तु ४ जनवरीको इसे वापस ले लिया गया था । न्यायालयने आयकर विभागको कांग्रेस नेताओंद्वारा प्रविष्ट की जानेवाली याचिका और परिपत्रका (सर्कुलरका) इसके पश्चात एक सप्ताहमें उत्तर प्रविष्ट करनेका निर्देश देते हुए प्रकरणको २९ जनवरीके लिए सूचीबद्ध कर दिया ।

यह प्रकरण ‘नैशनल हेरल्ड’से सम्बन्धित है, जिसमें कांग्रेस नेताओंके विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही चल रही है । राहुल और सोनिया गांधीकी ओरसे प्रस्तुत वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरमने कहा कि सीबीडीटीने ३१ दिसम्बरको एक परिपत्र देकर आयकर विधानके प्रावधानके अन्तर्गत एक कम्पनीके शेयरोंके प्रकरणमें स्पष्टीकरण दिया था; परंतु ४ दिवस पश्चात ही इसे यह कहते हुए वापस ले लिया कि प्रकरण न्यायालयमें है । चिदंबरमने कहा कि वह यह परिपत्र न्यायालयमें प्रस्तुत करना चाहते हैं; परंतु महा न्यायभिकर्ता (सलिसीटर जनरल) तुषार मेहताने इसपर आपत्ति प्रकट की । मेहताका कहना था कि राहुल और सोनिया गांधीको कोई भी सामग्री ब्यौरेमें प्रविष्ट करनेसे पूर्व इसका कारण बताते हुए याचिका देनी होगी ।

 

“६८ लाख रूपये आय दिखानेवालोंपर १०० कोटि रूपयोंका कर कैसे बना ?, क्या राहुल गांधी इसपर राष्ट्रको कुछ बता सकते हैं ? ‘राजनीति अर्थात मैं और मेरे जाननेवालोंका भला हो’, ऐसी नीतिवाले लोभी व स्वार्थी राज्यकर्ताओंने देशको इस स्थितिमें पहुंचाया है कि यहां यदि एक भूखसे पीडित बालक यदि रोटी उठा ले तो उसे पीटकर मार दिया जाता है और नेता चाहे अरबों लूट लें, उनपर कोई कार्यवाही नहीं है ! अतः अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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