देहलीमें आक्रमणका षड्यन्त्र कर रहा ‘जैश’का आतड्की सङ्गठन, पूछताछमें हुआ उजागर
१७ फरवरी, २०२१
राजधानी देहलीमें आतड्की कुचक्रमें जुटे, जम्मू-कश्मीरके ‘डीजीपी’ दिलबाग सिंहने रविवारको बताया कि पाकिस्तान स्थित आतड्की सङ्गठन ‘जैश-ए-मुहम्मद’ किसी बडे आक्रमणकी योजनामें है । कश्मीरमें सक्रिय आतड्कियोंने अब पाकिस्तानके साथ-साथ बिहारसे भी शस्त्रोंका क्रय-विक्रय प्रारम्भ कर दिया है ।
आतड्की घटनाके लिए पंजाबमें शिक्षा ग्रहण करनेवाले कुछ कश्मीरी छात्रोंका दुरुपयोग किया जा रहा था । इन अवैध शस्त्रोंका घाटीतक लानेके लिए अनेक नियोजन किए गए थे । आतड्की हिदायतुल्ला मलिक और जहूर अहमद राथरको बन्दी बनानेके पश्चात दोनोंसे हुई पूछताछमें यह सूचनाएं मिली हैं । मलिक ‘लश्कर-ए-मुस्तफा’का संस्थापक है, तो जहूर द ‘रेजिस्टेंट फ्रंट’से जुडा हुआ है ।
मलिकको जम्मूके कुंजवानीसे पकडा गया था । वहीं राथर सांबा जनपदके बारी ब्राह्मना क्षेत्रसे पकडा गया है । ये दोनों ‘जैश’ और ‘लश्कर’का ‘मुखौटा’ सङ्गठन चला रहे थे । मलिकको उसकी पत्नी सहित ४ आतड्कियोंके साथ पकडा गया, जो पिछले वर्ष एक बैंक वाहनसे ६० लाख रुपयेकी लूटके आरोपी हैं । उसने पाकिस्तानमें आतड्कवादका प्रशिक्षण लेकर कश्मीरमें अपना सङ्गठन स्थापित किया । अबतक इस ‘नेटवर्क’के ८ आतड्कियोंका अभिज्ञान जो चुका है ।
आईजी मुकेश सिंहने पाकिस्तानका षड्यन्त्र उजागर करते हुए कहा था कि सोहेलको ‘आईईडी’ लगानेके लिए तीनसे चार स्थानोंका चयन किया गया था । इनमें रघुनाथ मन्दिर, ‘बस स्टैण्ड’, ‘रेलवे स्टेशन’ और लखदाता विपणिका (बाजारका) नाम सम्मिलित था । इसमेंसे किसी एक स्थानपर उसे ‘आईडी’ रखना था । इस ‘आईईडी’को रखनेके पश्चात उसे श्रीनगरकी ‘फ्लाइट’ पकडनी थी ।
पुलिसकी सतर्कताके कारण यह आत्मघाती घटना होते-होते बची, पर यह एक दुर्भाग्यकी बात है कि भारत शासनद्वारा, जो पाकिस्तान स्थित आतड्की सङ्गठन हैं, उनके प्रति कोई कठोर निर्णय नहीं लिया जा रहा है; जबकि पाकिस्तान स्थित आतड्की सङ्गठन यह कार्य अनेक बार कर चुका है और पाकिस्तान उसका सहयोगी है; अतः इस शत्रु राष्ट्रको दण्ड देनेका समय आ गया है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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