अलीगढ विश्वविद्यालयका अनुसंधान विद्वानसे आतंकी बना मन्नान वानी ढेर, महबूबाने शोक प्रकट किया !


अक्तूबर ११, २०१८

अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयके अन्वेषण क्षेत्रमें (रिसर्चमें) विद्वान से हिजबुल मुजाहिदीनका अधिकारी बना मन्नान बशीर वानी वीरवारको साथी सहित उत्तरी कश्मीरमें भिडन्तमें मारा गया । अभियानमें दो जवान चोटिल भी हुए हैं । भिडन्त स्थलसे शस्त्र व विस्फोटक भी मिला है । उत्तरी कश्मीरके हंदवाडामें भिडन्त आरम्भ होते ही हिंसा भडक उठी । विद्यालय बन्द कर दिए गए । चलभाषपर जालस्थल सेवा ठप करनेके साथ ही रेल सेवा भी स्थगित कर दी गई ।

हंदवाडाके शाटगुण्ड क्षेत्रमें मन्नान वानीके दो साथियोंके साथ उपस्थित होनेकी सूचनापर सुरक्षा बलोंने घेराबन्दी की थी । राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ और एसओजीने घेराबन्दी कडी करते हुए आतंकियोंको समर्पणका अवसर दिया । कई बार ध्वनिविस्तारक यन्त्रसे (लाउड स्पीकरसे) आतंकियोंको समर्पणके लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने समर्पण करनेके स्थानपर गोलीबारी कर घेराबन्दी तोडकर भागनेका प्रयास किया । कार्यवाहीमें दो आतंकियोंको मार गिराया गया । बादमें इनका संज्ञान कुपवाडाके तकीपोराके मन्नान बशीर वानी और तुलवारी लंगेटके आशिक हुसैन जरगरके रूपमें किया गया ।

भिडन्त आरम्भ होते ही पूरे क्षेत्रमें हिंसा भडक उठी । आस-पासके क्षेत्रोंसे भी लोग भिडन्त स्थलपर पहुंच गए । उन्होंने सुरक्षा बलोंपर भारी पथराव किया । स्थितिको नियन्त्रित करनेके लिए सुरक्षा बलोंको आंसू गैसके गोले छोडने पडे । इसके पश्चात भी स्थिति नहीं सम्भली तो पैलेट गन चलाए गए । हिंसक प्रदर्शनके पश्चात उपजे तनावको देखते हुए कुपवाडा जनपदके सभी विद्यालयोंको बंद कर दिया गया । साथ ही हंदवाडामें भारी संख्यामें सुरक्षाबलोंको तैनात किया गया है । मन्नानके मारे जानेके पश्चात उसके शवको परिजनोंको सौंप दिया गया । देर शाम पैतृक गांवमें जनाजेमें काफी संख्यामें लोग पहुंचे ।

मन्नान वानी सेनाकी सर्वाधिक ऐच्छिक (मोस्ट वांटेड) आतंकियोंकी सूचीमें सम्मिलित था । उसने इस वर्षके आरम्भमें अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयसे पीएचडी  छोडकर हिज्बुल मुजाहिदीनका हाथ थाम लिया था । हिज्बुलने उसे कुपवाडाका अधिकारी बनाया था । कई बार वह सुरक्षा बलोंको चकमा देकर भागनेमें सफल रहा था । संगठनमें सम्मिलित होनेके पश्चात ही सुरक्षा विभाग उसे ढूंढ रहे थे । इसी वर्ष जनवरी माहमें हिजबुलमें सम्मिलित होनेके पश्चात विश्वविद्यालयने मन्नानको निष्कासित कर दिया था ।

“जिस वृक्षका मूल अथवा बीज ही विषकारक हो उसे चाहे कितने ही मीठे फलोंके पौधोंसे घिराव करें, वह विष ही देगा ! इनके साथ वही है, फिर मन्नान हो या पूर्व मुख्यमन्त्री !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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