महबूबा मुफ्तीको श्रीनगर उच्च न्यायालयसे भी झटका, पारपत्र (पासपोर्ट) उपलब्ध करानेका निर्देश देनेका निवेदन-पत्र न्यायालयने किया अस्वीकृत


३० मार्च, २०२१
       जम्मू और कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीके पारपत्रके नवीनीकरणकर उपलब्ध करनेकी मांगको श्रीनगर उच्च न्यायालयने अस्वीकृत कर दिया और कहा कि यह प्रकरण उसके अधिकार क्षेत्रसे बाहरका है ।
     महबूबा मुफ्तीके प्रकरणकी सुनवाई करते हुए श्रीनगर उच्च न्यायालयके न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रेने कहा कि पुलिस सत्यापनके विवरणके आधारपर पारपत्रका नवीनीकरण ‘रद्द’ किया है । ऐसे प्रकरणमें मैं कोई निर्देश नहीं दे सकता । उन्होंने कहा कि पारपत्र जैसे प्रकरणोंमें ‘कोर्ट’के पास सीमित अधिकार क्षेत्र ही बनता है । उन्होंने कहा कि ये पूर्ण रूपसे प्रशासनिक प्रकरण है । ‘कोर्ट’ने भी कहा कि वो इस प्रकरणमें हस्तक्षेपके लिए कोई कारण नहीं जान पाए हैं ।
     उल्लेखनीय है कि महबूबा मुफ्तीपर ‘मनी लॉण्ड्रिंग’का प्रकरण चल रहा है । इसी प्रकरणमें गुरुवारको ‘ईडी’के दलने उनसे ५ घण्टे तक पूछताछ भी की थी । प्रवर्तन निदेशालयके दलने मुफ्तीके श्रीनगर स्थित घरसे २३ दिसम्बर २०२० को एक लेखपुस्तिका प्राप्तकी थी, जिसमें कई प्रकारके वित्तीय लेनदेनका उल्लेख था । जांंच अभिकरण (एजेंसी) इसीकी पडतालमें लगी हुई है ।
     यही कठोरता गत ७० वर्षोंसे पृथकतावादी तत्त्वोंके विरुद्ध अपनाई जानी चाहिए थी । राष्ट्रीय जांच अभिकरणको यथाशीघ्र जांच पूर्णकर कठोर कार्यवाही करनी चाहिए । हिन्दूराष्ट्रमें विश्वके किसी भी राष्ट्रमें पृथकतावादी तत्त्वोंका अस्तित्व नहीं होगा; क्योंकि सर्वप्रजा सुसंस्कारी व परहितके लिए ही सदैव तत्पर होगी, अर्थात सभीकी आध्यात्मिक प्रगति ही सर्वोच्चतम उद्देश्य होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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