कश्मीरी पण्डितोंकी केवल ‘घर वापसी’ ही नहीं, पैतृक सम्पत्तिपर कर सकेंगे प्रतिवाद, सम्मानमें लिखे जाएंगे मार्गों और महाविद्यालयोंके नाम
९ सिंतबर, २०२१
प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीके नेतृत्ववाले ‘एनडीए’ शासनने, गत वर्षोंमें जम्मू-कश्मीरमें स्थानीय परिवर्तनका आरम्भ किया है । इससे, केन्द्र शासित प्रदेशमें, विकासके नए आयाम दृष्टिगत हुए हैं । इसने दशकों पूर्व, इस्लामिक आतङ्कवादके कारण अपना घर छोडनेको विवश हुए, कश्मीरी पण्डितोंकी ‘वापसी’के मार्ग भी स्पष्ट कर दिए हैं । इसी शृंङ्खलामें शासनने, दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं । पहला श्रीनगरके प्रसिद्ध मार्गों, भवनों और महाविद्यालयोंके नाम हिन्दुओंके सम्मानमें रखनेका निर्णय । दूसरा एक ‘ऑनलाइन पोर्टल’ प्रस्तुत किया गया है, जिसकेद्वारा, कश्मीरी पण्डित अपनी पैतृक सम्पत्तियोंपर प्रतिवाद (दावा) कर सकते हैं ।
यद्यपि, जैसा कि पूर्वसे ही अपेक्षित था । शासनके इस पगकी कई राजनीतिक दलोंने आलोचना की है । ये दल, इसे ‘टोकनवाद‘ के रूपमें देख रहे हैं । इन दलोंका आरोप है कि शासन, घाटीको रहने योग्य बनानेके लिए गम्भीर नहीं है ।
‘पोर्टल’ प्रस्तुत करके, कश्मीरी पण्डितोंके लिए अचल सम्पत्ति अधिनियमको समुचित रूपसे पालन करवाने हेतु, शासनने जनपद आयुक्तोंको शक्तियोंका हस्तान्तरण भी सुनिश्चित किया है । इसके अतिरिक्त, जनपद आयुक्त यह भी सुनिश्चित करेंगे कि कश्मीरी पण्डितोंकी सम्पत्तियोंपर, कोई अतिक्रमण न हो, भले ही उसका कोई परिवाद प्रविष्ट नहीं किया गया हो ।
तीससे अधिक वर्षोंसे, अपने ही राष्ट्रमें शरणार्थीके रूपमें रह रहे, कश्मीरी हिन्दुओंको आशाकी किरण केन्द्र शासनके इस निर्णय से मिली है । सभी राष्ट्रवादी शासनसे आशा करते हैं कि शासन अपने इस निर्णयको पूर्ण निष्ठासे कार्यान्वित करेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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