श्रीनगरमें आतङ्कियोंसे हुई चूक, कश्मीरी पण्डितके स्थानपर इब्राहिम खानकी हत्या
११ नवम्बर, २०२१
जम्मू-कश्मीर ‘इस्लामी’ आतङ्कियोंने ८ नवम्बर २०२१ को श्रीनगरके पुरातन शहर क्षेत्रमें मोहम्मद इब्राहिम खानकी गोली मारकर हत्या कर दी । जहां इब्राहिम खान चाकरी करता था, उस आपणीके स्वामी डॉ. संदीप मावाको ज्ञात था कि आतङ्की कभी भी उसकी हत्या कर सकते हैं । उसे मध्याह्नमें ‘पुलिस’ने यह दूरभाषपर बताया था; अतः वे अपना नित्यका बडा वाहन न लेकर छोटी गाडीसे निकले । इब्राहिम खान लगभग रात्रि ८ बजे उनकी नित्यकी गाडी ‘एक्सयूवी’ लेकर निकला, तो उसे आपणीका स्वामी मानकर, आतङ्कियोंने उसपर गोलियां चलाईं, जिससे उसकी तत्काल मृत्यु हो गई ।
पूर्वमें १९९० के दशकमें उनके पितापर भी ऐसा ही आक्रमण हुआ था । उनके पिता देहलीमें निवास करते हैं तथा ये अपनी पत्नी व बच्चों संग श्रीनगरमें निवास करते हैं । उन्होंने कहा कि वे भयभीत होकर कश्मीर छोडकर नहीं जाएंगे । २०१९ से वे कश्मीरमें लौट आए हैं ।
आतङ्की संगठन ‘मुस्लिम जनबाज फोर्स’ने इस घटनाकी उत्तरदायित्व लेते हुए कहा है कि उनपर आक्रमण इसलिए किया गया; क्योंकि संदीप और उनके पिता रोशनलाल मावा भारतीय अभिकरणों (एजेंसीयों) हेतु कार्य करते हैं ।
दीपावलीके पश्चात घाटीमें यह दूसरी हत्या है । इससे पूर्व आतङ्कियोंने बटमालू क्षेत्रमें ‘पुलिस’ अधिकारी तौसीफ अहमदकी हत्या की थी । आतङ्कियोंद्वारा १० हिन्दू नागरिकोंकी हत्याके उपरान्त, घाटीमें अति सतर्कता (हाई अलर्ट) है ।
संदीप मावा सौभाग्यसे बच गए हैं; अन्यथा हत्या तो उन्हींकी की जानी थी ! संदीप मावा या कश्मीरके सभी हिन्दू, उनका क्या दोष है, जो उन्हें चयनितकर मारा जा रहा है ? इस प्रश्नपर सभी हिन्दू चिन्तन करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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