सर्वप्रथम यह जान लें कि कोई भी साधना मार्गका अवलंबन साधक अपने मनको एकाग्र करने हेतु करते हैं ! और मनका एकाग्र होना अर्थात मनका निर्विचार होना ही है वह जितनी अधिक समय उस स्थितिमें रहता है वह साधनाकी दृष्टिसे उतना ही उत्तम होता है | सांसके साथ नामजप जोडकर करनेका उद्देश्य यही होता है कि मन एकाग्र होकर सांस लेनेकी प्रकियापर स्थिर हो जाए एवं धीरे-धीरे मन निर्विचार अवस्थाकी ओर बढे और यह स्थिति यदि आपकी साध्य हो रही हैं तो साधनाकी दृष्टिसे अति उत्तम है, इसका और अभ्यास करें एवं जितना अधिक समय मनको निर्विचार रख सकते हैं, रखें ! प्राथमिक अवस्थाके साधकोंके लिए नामजपका मूल उद्देश्य होता है अनेक विचारसे एक विचारकी ओर मनको ले जा सके इसलिए उसका अभ्यास संख्यात्मक एवं गुणात्मक रूपसे बढाते जाना चाहिए एवं गुणात्मक वृद्धि हेतु नामजपको सांसके साथ जोडकर करना एक उत्तम मध्याम है !
Leave a Reply