जनताके धनका अपव्यय, रघुबर शासनने ४ वर्षोंमें प्रचार-प्रसारपर व्यय किए ३ अरब रुपये !!


दिसम्बर २८, २०१८

झारखण्डमें रघुवर दासके नेतृत्वका गठबंधन शासनने दिसम्बर २०१४ से लेकर अबतक ३०० कोटिसे अधिक रुपए केवल अपने प्रचार-प्रसारमें व्यय कर दिए । ‘आरटीआई’के अन्तर्गत मांगी गई जानकारीसे यह उजागर हुआ है । जितनी राशि शासनने विज्ञापनमें व्यय की है, उतनी राशिसे राजधानीमें कई फ्लाईओवर और निर्धन रेखासे नीचे रहने वाले सहस्रों परिवारोंको घर उपलब्ध कराया जा सकता था । केवल विज्ञापनके नामपर तीन अरबसे अधिक व्यय करनेका शासनने विचित्र कीर्तिमान स्थापित कर दिया ।

मुख्यमन्त्री रघुवर दासने गत चार वर्षोंमें केवल विज्ञापनके नामपर लगभग ३२३ कोटि रुपये फूंक दिएं ! यह कोडरमाके ओंकरा विश्वकर्माकी ओरसे ‘आरटीआई’के अन्तर्गत मांगी गई सूचनाके पश्चात उजागर हुआ है । उन्हें दी गई सूचनामें यह बताया गया कि विभिन्न कार्यक्रमोंमें फलक, विज्ञापन-पत्र लगानेसे लेकर ‘प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया’के माध्यमसे शासनने यह राशि व्यय की है ।

जनताका धन शासन विज्ञापनमें उडा देनेपर विपक्षने शासनसे उत्तर मांगा है । पूर्व मुख्यमन्त्री और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेनने इसे केवल रघुवर दासके प्रसारके लिए व्यय राशि बताई है । वहीं रघुवर दासके लोग इसे शासनकी उपलब्धता बतानेका माध्यम बता रहे हैं और इसको भी सामान्य मान रहे हैं ।

सूचनाके अधिकारके अन्तर्गत बताया गया कि शासनने वर्ष २०१४ से लेकर १२ दिसम्बर २०१८ तक लगभग ३२३ कोटि रूपए व्यय किए । वर्ष २०१४-१५ में विज्ञापनके लिए ४० कोटिका आवंटन किया गया था । इसमें सम्पूर्ण राशि व्यय कर दी गई !! इसके अतिरिक्त वर्ष २०१५-१६ में ५५ कोटि रुपए विज्ञापनके लिए आवंटित हुए, जिसमें ५४ कोटि ९९ लाख रुपए व्यय हुए ! वहीं २०१६-१७ में ७० कोटि, २०१७-१८ में ७८ कोटि और २०१८-१९ में ८० कोटि रुपए विज्ञापन मदमें आवंटित किए थे ।

सभी राशि लगभग व्यय कर दी गई । प्रत्येक वित्तिय वर्षमें विज्ञापनकी राशिमें वृद्धि की गई और विज्ञापनके नामपर व्यय भी किया गया । यदि एक औसत भी देखा जाए शासनने प्रत्येक वर्ष लगभग ८० कोटि रुपए केवल विज्ञापनमें ही व्यय कर दिए !

 

“धर्महीन, संस्कारहीन जनता होनेके कारण शासन करने वाले उन्हींमेंसे चयन किए जाते हैं तो शासकगण भिन्न वृत्ति कहांसे लाएंगें । उन्हीं संस्कारोंका अनुसरण करते हुए वे कृत्य करते हैं । स्वतन्त्रताके पश्चात यहीं हो रहा है कि शासनतन्त्र घर भरने व लूटका माध्यम मात्र बनकर रह गया है; अतः अब धर्मनिष्ठ राष्ट्र ही इसका एकमात्र समाधान है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : एबीपी न्यूज



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