‘जिन्न’का भय दिखाकर ८वींकी छात्रासे ठग ‘मौलवी’ने लूटे ८ लाख रुपए
१ सिंतबर, २०२१
लखनऊमें रहनेवाले एक परिवारने अपनी आठवीं कक्षामें अवयस्क बालिकाको ‘ऑनलाइन’ अध्ययनके लिए एक भ्रमणभाष (मोबाइल) प्रदान किया था । छात्राने ‘ऑनलाइन’ कक्षाके मध्य ही अन्तर्जाल (इंटरनेट) ‘सर्फिंग’ प्रारम्भ की । इस मध्य छात्रा एक ‘लिंक’के माध्यमसे एक जालस्थलपर जा पहुंची, जहां उसे एक चलभाष क्रमांक मिला । छात्राद्वारा सम्पर्क करनेपर एक मौलवीने उसे झांसेमें फंसाकर उसपर एक ‘जिन्न’का ‘साया’ बताया तथा उसके साथ-साथ उसके पूरे परिवारपर प्राण सङ्कट होगा ।
इसके उपरान्त मौलवीने छात्रासे पैसोंकी मांगकी और अपने २ बैंक खातोंका विवरण दे दिया । छात्राने बताया कि उसे ‘ऑनलाइन ट्रांजेक्शन’ करना नहीं आता है, जिसके पश्चात ठग मौलवीने छात्राका ‘गूगल-पे’ खाता भी स्वयं बना दिया और उसकी मांके बैंक खातेपर उसे ‘लिंक’ भी कर दिया । इसके उपरान्त मौलवीने छात्राको भयभीतकर व धमकाकर लगभग ८ लाख रुपएसे अधिककी धनराशि ऐंठ ली ।
लगभग ३ माहसे अपनी पुत्रीको व्यथित देखकर जब जब छात्राकी मांने उससे इस विषयमें प्रश्न किया तो वह रोने लगी और उसने समूचा वृत्तान्त अपने माता-पिताको बता दिया । इसके उपरान्त छात्राके अभिभावकोंने ‘पुलिस थाने’में प्रकरण प्रविष्ट कर लिया है एवं आरोपी ठगको पकडनेके लिए जांच हो रही है ।
जिहादियोंके तो कण-कणमें छल भरा है; किन्तु सामान्य हिन्दू, चाहे किसी भी आयु वर्गका हो, धर्मशिक्षण व योग्य साधनाके अभावमें जिहादियोंके कुत्सित षड्यन्त्रोंद्वारा रचे गए अन्धविश्वासयुक्त विषयोंमें सहजतासे फंस रहा है । वस्तुतः बाल्यकालसे दैवी गुण आत्मसात न होने एवं विवेक जाग्रतिके अभावमें भूत-प्रेत, ‘जिन्न’, राक्षसों आदिके सन्दर्भमें अनियन्त्रित जिज्ञासा एवं आवेगसे अन्तर्मनमें नाना प्रकारके सन्ताप उत्पन्न होनेकी दशा असङ्ख्य मानसिक रोगोंका कारण है, जो जीवनपर्यन्त घातक सिद्ध हो सकता है; अतः हिन्दुओ, योग्य साधना सहित हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए कृतिशीलतामें ही परमहित निहित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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