बाबरीका प्रतिशोध लेने व तमिलनाडुमें मन्दिरोंकी प्रतिमाओंको क्षतिग्रस्त करनेवाला आरोपी जहांगीर बनाया गया बन्दी


२९ अगस्त, २०२१
          पडोसी राष्ट्र बांग्लादेशसे भारतमें होनेवाले अवैध घुसपैठके प्रकरण आए दिवस उजागर होते रहते हैं । बंगालके साथ-साथ यह अवैध घुसपैठिए जम्मू-कश्मीर, देहली एवं देशके विभिन्न राज्योंमें बस चुके हैं । शासन व प्रशासन भी इन प्रकरणोंमें कार्यवाही करनेमें पूर्णतः असमर्थ सिद्ध हो रहा है । इसी अन्तर्गत अब बंगालकी बांग्लादेश सीमाके गोएडांगा सीमा क्षेत्रसे १५३ सीमा सुरक्षा बलोंने जहांगीर बिस्वास नामक एक व्यक्तिको बन्दी बनाया है । आरोपी बांग्लादेशके सतखिरा क्षेत्रका रहनेवाला है । जहांगीर भारतमें मिस्त्रीका कार्य करते-करते अनेक मन्दिरोंपर प्रहार कर चुका था और उसमें स्थापित प्रतिमाएं भी उसने क्षतिग्रस्त की हैं । पूर्वमें ‘पुलिस’द्वारा इन प्रकरणोंपर ध्यान नहीं दिया जा रहा था; परन्तु ‘मीडिया’ व ‘सोशल मीडिया’के दबावके कारण तमिलनाडु ‘पुलिस’ अब इन प्रकरणोंको लेकर गम्भीर हो गई है । समाचारके अनुसार जहांगीरको इस बातकी भनक लग गई थी कि उसको बन्दी बनाने हेतु ‘पुलिस’ षड्यन्त्र कर रही है; अतः उसने बांग्लादेश लौटनेका निर्णय लिया था; परन्तु इसी मध्य ‘बीएसएफ’द्वारा उसे पकड लिया गया । बताया जा रहा है कि वह अफगानिस्तानकी सत्ता तालिबानके हाथमें चले जानेके कारण भारतमें तोडफोडकी योजना भी बना रहा था । बाबरी ढांचेके टूटनेके पश्चात अनेक बांग्लादेशी कट्टरपन्थियोंने ‘फेसबुक’पर प्रतिशोध लेनेका आह्वान करते हुए ऐसे ‘पोस्ट’ साझा किए थे । उल्लेखनीय है कि दक्षिण भारतके राज्य तमिलनाडुमें इस वर्ष जून माहमें शिवलिंग तोडने एवं प्रतिमाएं खण्डित करनेका प्रकरण आया था । वही किंजनजूर गांवमें स्थित कैलासनाथर मन्दिरमें भी प्रतिमाओंको खण्डित पाया गया था । मन्दिरमें स्थापित यह प्रतिमाएं प्राचीन चोल साम्राज्यकी थी ।
      जिहादियोंका मूल्य उद्देश्य हिन्दुओंके धर्मको नष्ट करना है और वह उसी हेतु प्रयासरत रहते हैं । जिस प्रकार पूर्वकालमें असुर धार्मिक अनुष्ठानोंमें विघ्न उत्पन्न करते थे, उसी प्रकार आजके कुछ पन्थ अब वही कृत्यकर रहें हैं । इस प्रकार वह अपने विनाशको ही निमन्त्रण दे रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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