०१ दिसंबर, २०२०
मुंबईमें २६/११ को हुए आतङ्की आक्रमणकी तिथिपर कर्नाटकके मेंगलुरु जनपदमें अदलात परिसर स्थित पुरानी पुलिस चौकीकी भीतको (दीवारोंको) कट्टरपन्थ व हिंसा प्रसारित करते वाक्योंसे भर दिया गया । वाक्योंमें चेतावनी दी गई कि यदि किसी व्यक्तिने पैगम्बर मोहम्मदके विषयमें कुछ भी नकारात्मक कहा, तो उसके शीशको उसके शरीरसे पृथक कर दिया जाएगा । यह वाक्य (ग्रेफिटी) कुछ इस प्रकार लिखे थे, “गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा ।” यह संयोग है कि ठीक इसी प्रकारके घोष पाकिस्तानी नागरिकोंद्वारा फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रोके विरोधमें लगाए गए थे, जिसमें रावलपिंडीके मार्गोंपर जिहादियोंद्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था । उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व ही बेंगलुरुकी भीतपर यह चेतावनी भी दी गई थी कि संघि व मनुवादियोंको समाप्त करनेके लिए ‘लश्कर-ए-तैयबा’ व ‘तालिबान’की सहायता भी ली जा सकती है ।
यदि इस प्रकारके प्रकरण किसी हिन्दूद्वारा मस्जिदकी भीतपर किया गया होता, तो सारा वामपन्थी समुदाय जिहादियोंके साथ मार्गोंपर उतर गया होता; परन्तु यह कृति ‘डरे हुए समुदाय’के लोगोंद्वारा की गई है; अतः यह उचित मानी जाएगी ऋ अब ऐसी राष्ट्रविरोधी गतिविधियोंपर प्रतिबन्ध लगाने हेतु शीघ्रातिशीघ्र हिन्दूराष्ट्रकी स्थापना करना आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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