स्वतन्त्रता दिवसपर १५०० दलितोंकी धर्म परिवर्तनकी चेतावनी, सुरक्षा विभाग सतर्क !


अगस्त ११, २०१८

हरियाणाके जीन्दमें १८३ दिवससे अपनी मांगोंको लेकर धरना दे रहे लगभग १५०० दलितोंने आगामी १५ अगस्तको धर्म परिवर्तन करनेकी चेतावनी दी है !
उनका दावा है कि यह धर्म परिवर्तन दिल्ली नही बल्कि जीन्दके धरना स्थलपर ही होगा और इसको लेकर उन्होंने व्यापक स्तरपर तैयारियां कर ली गई हैं ।

इन दलितोंका कहना है कि शासनसे अपनी मांगोंको लेकर सम्पर्क और बातचीत करनेके सभी प्रयास विफल रहनेके पश्चात उन्होंने अब विवशतामें यह पग उठानेका निर्णय लिया है । उन्होंने राज्य शासनपर दलित हिन्दुओंकी कोई सुनवाई न करने का भी आरोप लगाया ।

इस मध्य इन दलितोंके स्वतन्त्रता दिवसपर धर्म परिवर्तन करनेकी घोषणाके पश्चात सुरक्षा विभाग सतर्क हो गए हैं । ये दलित गत १८३ दिवसोंसे दलित संयुक्त कार्यवाही समितिके फलक तले दलितोंकी विभिन्न मांगोको लेकर यहां लघु सचिवालयके सामने धरनेपर बैठे हैं । गत ३१ मईको लगभग १२० दलितोंने मांगे न माने जानेके विरोधमें दिल्ली जाकर बौद्व धर्म अपना लिया था ।

समितिके संचालक दिनेश बौद्ध खापडने शनिवारको यहां बताया कि दलित कुटुम्ब अपनी मांगोंको लेकर संविधान और वैधानिक रूपसे आन्दोलन कर रहे हैं और दो बार चण्डीगढ और दिल्लीके लिए पैदल यात्रा तथा दो बार २३ और ३१ दिवसतक भूख हडताल भी कर चुके हैं । कई बार शासनसे मिलनेका भी प्रयास किया; लेकिन हर बार उनकी अनदेखी की गई !

उन्होंने बताया कि दलितोंने शासनसे वार्ता करनेके लिए अन्तिम प्रयास करते हुए जीन्दसे करनालतक २९ जुलाई से ३१ जुलाईतक पैदल यात्रा भी निकाली थी और करनाल जाकर मुख्यमन्त्रीके नाम अपनी मांगों और मिलनेके लिए ज्ञापन भी सौंपा था; लेकिन अभी तक शासनकी ओर से इस सम्बन्धमें कोई संकेत नहीं मिला है । उन्होंने कहा कि शासनकी ओरसे यदि अगले दो दिवसोंमें मिलनेका कोई न्यौता नहीं आता है तो स्वतन्त्रता दिवसपर प्रदेश भरसे लगभग १५०० दलित बौद्व धर्म अपना लेंगे !

ये दलित जीन्दमें ईश्वर सिंहकी मृत्युके पश्चात की गई सन्धि लागू करने, कुरूक्षेत्रके झांसा गांवकी दलित पुत्रीसे हुए दुष्कर्मकी जांच कराने, आसन काण्डमें दलित लडकीकी दुष्कर्मके पश्चात हत्यामें हुई सन्धि लागू करने, भिवानीके हालुवासमें नाबालिगसे दुष्कर्मपर शिकायतकर्ताको सुरक्षा और मुआवजा देने, हिसारके भटलामें दलितोंका सामाजिक बहिष्कार करने वालोंके विरूद्ध अभियोग करने और दलितोंपर प्रविष्ट अभियोग रद्द करने, मार्च २०१५ में छात्तरके सतीशकी मृत्युसे सम्बन्धित सन्धि लागू करने, १९८५ में पुलिस नाकेपर मारे गए नायक सूबे सिंहको शहीदकी उपाधि और उसके पुत्रको नौकरी देने, जंतर-मंतरपर भिवानीके बामलाके फौजीके आत्महत्या प्रकरणमें की गई घोषणा लागू करने, प्रदेशमें अम्बेडकरकी मूर्तियोंकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दलितोंपर अत्याचारोंपर अंकुश लगाने शकी मांग कर रहे हैं !

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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