जून १९, २०१८
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासनने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोगको भेजे अपने उत्तरमें कहा है कि विश्वविद्यालयकी शैक्षणिक परिषदकी बैठकमें ‘इस्लामी आतंकवाद’पर किसी पाठ्यक्रमका प्रस्ताव नहीं किया गया है । दिल्ली अल्पसंख्यक आयोगके अध्यक्ष जफर-उल-इस्लाम खानने मंगलवारको यह सूचना दी ।
उन्होंने बताया कि जेएनयूके कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रमोद कुमारने कहा कि शैक्षणिक परिषदकी बैठकमें ‘इस्लामी आतंकवाद’पर कोई पाठ्यक्रम प्रस्तावित नहीं किया गया । प्रसार वाहन विवरणका संज्ञान लेते हुए आयोगने विगत माह सूचना देकर विश्वविद्यालयमें प्रस्तावित पाठ्यक्रमको आरम्भ करनेका कारण पूछा था ।
खानने बताया कि कुलसचिवने आयोगको प्रस्तावित ‘सेण्टर फॉर नेशनल सिक्यूरिटी स्टडिज’के अवधारणा पत्रकी एक प्रति भेजी है और कहा है कि जेएनयूको इसकी सूचना नहीं है कि किसी भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालयमें ‘इस्लामी आतंकवाद’पर कोई पाठ्यक्रम पढाया जाता है या नहीं ? कुमारने १८ मईको हुई १४५ वीं शैक्षणिक परिषदकी बैठकमें हुई चर्चाके विवरणकी एक प्रतिभी आयोगको दी है, जहां इसे चर्चाके लिए रखा गया था ।
आयोगके अध्यक्षने कहा ‘जेएनयूके कुलसचिवके आश्वासनके विपरीत, अवधारणा पत्रमें प्रस्तावित केन्द्रके मुख्य क्षेत्रोंके भागके रूपमें ‘इस्लामी आतंकवाद’ सम्मिलित है । इन क्षेत्रोंमें पढानेसे पूर्व उनमें शोध करना होगा ।’
उन्होंने कहा कि आयोगने जेएनयूको फिरसे पत्र लिखा है और कहा है कि प्रस्तावित केन्द्र अच्छा आरम्भ है और देशको इसकी आवश्यकता है; लेकिन केन्द्रमें शोध और शिक्षणके विषयके रूपमें ‘इस्लामी आतंकवाद’का विषय लाना ‘दोषपूर्ण’ है और यह परिसरमें साम्प्रदायिक सौहार्दको हानि करेगा और मुसलमानोंको लेकर एक गलत विचार पैदा करेगा ।
स्रोत : जी न्यूज
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