जेएनयू देशद्रोह प्रकरणमें न्यायालयने कहा, फाइल नहीं रोक सकता देहली शासन !!


जनवरी ६, २०१९


राजधानी देहलीके जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालयमें राष्ट्रविरोधी उद्घोषके प्रकरणपर बुधवार, ६ फरवरीको पटियाला हाउस न्यायालयने देहली पुलिससे शीघ्र प्रकरणमें आरोपपत्र प्रविष्ट करनेका आदेश दिया है । यद्यपि, पुलिसने कहा है कि अभीतक उन्हें राज्य शासनसे आज्ञा नहीं मिली है । इसपर न्यायालयने कडा रवैया अपनाया है ।

न्यायालयने कहा कि पुलिस शीघ्रातिशीघ्र राज्य शासनसे अनुमति ले । देहली शासन इसप्रकारके प्रकरणकी ‘फाइल’ नहीं रोक सकती है ! इसकी अगली सुनवाई अब २८ फरवरीको होगी !

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व इस प्रकरणमें देहली पुलिसको भी न्यायालयसे देहली शासनसे बिना आज्ञा लिए आरोपपत्र प्रविष्ट करनेपर फटकार लग चुकी है ।

दिल्ली पुलिसने देशद्रोह प्रकरणमें १४ जनवरी २०१८ को १२०० पृष्ठोंका आरोपपत्र प्रविष्ट किया था । इसमें पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और सात अन्य कश्मीरी छात्रोंको आरोपी बनाया गया है ।

उल्लेखनीय है कि ९ फरवरी, २०१६ में जेएनयूमें एक कार्यक्रम आयोजित किया था । ये कार्यक्रम संसद आक्रमणके प्रमुख अफजल गुरुको फांसी दिए जाने के विरोधमें आयोजित किया गया था, जिसके बाद एक ध्वनि सन्देश प्रसारित हुआ था, जिसमें कथित रुपसे देशद्रोही उद्घोष लगानेकी बात कही गई थी !

 

“देहलीका केजरीवाल शासन इस प्रकरणको अटकाकर स्वयं राष्ट्रद्रोहियोंका साथ देकर राष्ट्रद्रोह कर रहा है, यह उन्हें ध्यानमें रखना चाहिए और इससे यह भी ज्ञात होता है कि केजरीवालजीकी मानसिकता राष्ट्रद्रोहियोंके साथ है । कहां राष्ट्र परिवर्तन करने चले थे और अब कहां राष्ट्रद्रोहियों और मुस्लिम तुष्टिकरणमें घुसकर एसपी-बीएसपी जैसा एक राजनीतिक दल मात्र बनकर रह गए है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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