दो दिवस पूर्वके एक लेखके सन्दर्भमें एक ज्योतिषीने पूछा है कि आपने जो लिखा वह सत्य है । मैं पहले अपने दुःखोंके निराकरण हेतु ज्योतिषियोंके पास जाता था एवं उनके बताए हुए कुछ उपाय करनेपर मेरे कष्ट न्यून हए और मैं इसी कारण इस शास्त्रकी ओर आकृष्ट हुआ और आज यह मेरे जीविकोपार्जनका माध्यम है । आपके लेखको पढकर मैं अपनी स्थितिको आपके कथन अनुरूप ही पा रहा हूं; किन्तु मैं अब यह व्यवसाय नहीं छोड सकता हूं, कृपया बताएं मैं क्या कर सकता हूं ?


एक सरलसा शास्त्र जान लें ! जब भी आप किसीको भी किसी भी समस्याका समाधान बताते हैं तो आपपर अनिष्ट शक्तियोंके कष्ट होनेकी आशंका अवश्य हो सकती है । यदि आपका आध्यात्मिक स्तर ६०% से अधिक न हो; क्योंकि आजके कालमें लोगोंकी अधिकांश समस्याएं चाहे वे शारीरिक हों, मानसिक हों, आर्थिक हों या कौटुम्बिक हों, उनका मूल कारण आध्यात्मिक ही होता है । ऐसेमें यदि आप ऐसे व्यवसायसे हैं तो अपनी व्यष्टि साधना बढाएं । इससे आपपर ईश्वरीय कवच रहेगा और आपका आध्यात्मिक स्तर भी उत्तरोत्तर बढेगा और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अपने अहंपर ध्यान दें ! यदि वह अधिक है तो कष्ट होनेकी आशंका अवश्य होगी । अतः विनम्र रहें और नित्य अपने कर्मोंका कर्तापन ईश्वरको अर्पण करें !



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