मुख्यमन्त्री कमलनाथकी कांग्रेस भक्ति, आपातकालमें कारावास गए लोगोंके निवृत्ति भत्ता बन्द किया !


जनवरी ३, २०१८

मध्य प्रदेशके मुख्यमन्त्री कमलनाथद्वारा आपातकालके समय ‘मीसा’के अन्तर्गत कारावासमें बंद आंदोलनकारियोंको दिए जा रहे निवृत्ति वेतन (पेंशन) रोकनेके प्रकरणमें भाजपाके पश्चात अब कांग्रेसके सहयोगी शरद यादवने भी विरोध प्रकट किया है । शरद यादवने कहा है कि ‘मीसा वेतन’ बंद नहीं किया जाना चाहिए, वरन शासनको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उचित व्यक्तियोंतक इसका लाभ पहुंचे ।


आजतकसे वार्तामें ‘लोकतान्त्रिक जनता दल’के नेता शरद यादवने कहा कि कमलनाथ शासनको पूर्व शासनद्वारा प्रदत्त ‘मीसा वेतन’ बंद नहीं करना चाहिए, परन्तु यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इसका लाभ उचित लोगोंतक पहुंचे । उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व शासन उन लोगोंको भी वेतन दे रही थी, जिन लोगोंने आपातकालके समय क्षमा मांगी थी । वे स्वयं ४ वर्ष कारावासमें बंद रहे, परन्तु कभी भी वेतनकी मांग नहीं की ।

केन्द्रीय मन्त्री पीयूष गोयल ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘इंदिरा गांधीके ‘तीसरे पुत्र’ने उन लोगोंका निवृत्ति वेतन (पेंशन) बंद कर दिया, जिन्होंने आपातकालके समय भारतके सबसे काले दिवसोंमें लोकतान्त्रिक मूल्योंकी लडाई लडी ।’

उल्लेखनीय है कि २९ दिसम्बर, २०१८ को जारी शासनादेशमें कहा गया है कि जिन्हें वेतन मिलता है, उसकी जांच की जाएगी, तदोपरान्त इसे आरम्भ किया जाएगा । सामान्य प्रशासन विभागने इसका कारण वेतन प्राप्त करनेवालोंका भौतिक सत्यापन और वेतन वितरणकी प्रकियाको अधिक पारदर्शी बनाना बताया है और इसके लिए ‘सीएजी’के ब्यौरेको आधार बनाया गया ।

मध्य प्रदेशके पूर्व भाजपा शासनमें ‘लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम’के अन्तर्गत कुल २००० से अधिक मीसाबंदी २५ सहस्र रुपये मासिक निवृत्ति वेतन ले रहे हैं । वर्ष २००८ में शिवराज शासनने ३००० और ६००० देनेका प्रावधान किया, जिसे बादमें बढाकर १०,००० रुपये की गई । वर्ष २०१७ में मीसा बंदियोंकी राशि बढाकर २५००० रुपये की गई !

 

“कमलनाथने निवृत्ति वेतन (पेंशन) बन्द करके गांधी परिवारके प्रति अपनी भक्ति ही सिद्ध कर रहे हैं और आपातकालको उचित बतानेका प्रयास, जो किसीप्रकारसे योग्य नहीं है और आन्दोलनकारी, जिन्होंनें आपातकालके भयावह निर्णयका विरोध किया था, उनका भी अपमान किया है । इसमें मात्र ‘आरएसएस’के लोग नहीं थे, ये वे साधारण जन है, जो अत्याचारोंके विरुद्ध लडे थे, जिनमें मुख्यतः स्वतन्त्रता सेनानी भी हैं ! अतः मुख्यमन्त्री अपनी दल भक्तिको छोडकर इस वेतनको पुनः आरम्भ करें, क्योंकि वे अब तीसरे पुत्र नहीं वरन राज्यके मुखिया है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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