अभिनेत्री कंगनाका कटु सत्य, मुगल, ब्रिटिश और इटलीका दास रहा है भारत, अब मिली स्वतन्त्रता !


अप्रैल २९, २०१९

 

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत देशसे सम्बन्धित प्रकरणपर अपना प्रखर परामर्श रखनेके लिए जानी जाती हैं । मणिकर्णिका चलचित्रसे ख्याति प्राप्त करनेवाली कंगना राजनीतिक प्रकरणोंपर बोलनेपर भी मुखर रही हैं । इसके लिए न जाने कितने ही अभिनेताओंके लक्ष्यपर आ चुकी कंगनाने बॉलीवुडमें वंशवादके विरुद्घ बोलकर अपने ही कार्यक्षेत्रके लोगोंको निराश कर दिया था । अब कंगना रनौतने वक्तव्य दिया है, जिसके कारण सामाजिक प्रसार माध्यमपर लोगोंने भिन्न-भिन्न प्रतिक्रियाएं दीं । कंगनाने कहा कि भारत न केवल मुगलों और अंग्रेजों, वरन इटलीका भी दास रहा है । उन्होंने गत शासनपर देशको निर्धन बनाए रखनेका आरोप लगाते हुए ‘भारतके लिए’ मतदान करनेका निवेदन किया ।

कंगनाने स्पष्ट कांग्रेसपर आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक वो लोग सत्तामें थे, तबतक देशमें निर्धनता, भूखमरी और प्रदूषणका वातावरण तो था ही, साथ-साथ बलात्कारकी घटनाएं भी बढ गई थीं । कंगनाने लोगोंसे बडी संख्यामें देशके लिए वोट करनेकी विनती की । कंगनाने चलचित्र जगतके लोगोंपर राजनीतिक रूपसे निष्क्रिय होने और उचित वस्तुओंके लिए न बोलनेका आरोप लगाया था । कंगना इससे पूर्व भी कई बार प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीका समर्थन कर चुकी हैं और विश्वास व्यक्त चुकी हैं कि उनके नेतृत्वमें देशके प्रशासनमें सुधार आया है, देश विकासकी राहपर जा रहा है ।

कंगनाके वक्तव्यपर विवादित चलचित्र समीक्षक और अभिनेता कमाल आर खान (KRK) क्रोधित हो गए और पूछा कंगना नशेमें थी क्या ? केआरकेने गिनाते हुए कहा कि मनमोहन, मोदी और वाजपेयीमेंसे कोई भी इटलीके नागरिक नहीं थे । बता दें कि कंगनाका संकेत यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधीकी ओर था ।

 

“कंगना रनौत भ्रामक व मायावी चलचित्र जगतमें उन कुछ लोगोंमेंसे हैं, जो राजनीतिपर मुखर होकर सत्यका पक्ष लेती हैं, जो कि प्रशंसनीय है । दुखद बात है कि भारतीय जनता चलचित्र जगतके लोगोंको अपना आदर्श मानती है और उनका अनुसरण करती है; परन्तु ऐसेमें यदि यदि चलचित्र जगतमें लोग मुखर और सत्यनिष्ठ हो तो वह अन्तर भारतीय समाजपर अवश्य ही दिखेगा; परन्तु ऐसा होता नहीं है । ऐसेमें कंगना सदृश अभिनेत्रियां अपनी मुखरताके लिए प्रशंसाकी अवश्य ही पात्र है । वे उस सत्यको बोल रही है, जो हमारे लेखक, समाचार पत्र और वामपन्थी समर्थक लोग बोलनेसे भी डरते हैं, या यूं कहें कि बोलना ही नहीं चाहते हैं ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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