हरियाणामें शस्त्रों सहित पकडा गया खालिस्तानी आतङ्की ‘एसएफजे’से जुडे, २ नेताओंकी हत्याका मिला था निर्देश


०१ जनवरी, २०२१
     हरियाणा पुलिसने वर्तमानमें करनालसे दो शस्त्रधारी खालिस्तानी आतङ्कवादियोंको बन्दी बनाया था, जो ‘सिख फॉर जस्टिस’के लिए कार्य कर रहे थे । बन्दी किए गए आतङ्कवादियोंने पूछताछके मध्य उजागर हुआ कि वह अमेरिकी मूलके गुरमीत सिंहके सम्पर्कमें थे । खालिस्तानी गुरमीत सिंहने इनके खातेमें ‘मनीग्राम’केद्वारा लाखों रुपए भेजे थे ।
     पूछताछमें दोनों आरोपियोंने यह भी बताया कि गुरमीत सिंहने उन्हें शस्त्र क्रय करने और दो ऐसे लोगोंकी हत्या करनेका आदेश दिया था, जिन्होंने कथित ढंगसे सिख पन्थके विरुद्ध बोला था । दैनिक जागरणमें प्रकाशित समाचारके अनुसार, बन्दी किए गए खालिस्तानियोंका नाम तेजप्रकाश (काका) और आकाशदीप सिंह (सोनू) है । दोनों लुधियानाके रहनेवाले हैं । हरियाणाकी ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ने इनके पाससे कई शस्त्र और ‘कारतूस’ प्राप्त किए हैं ।
     हरियाणा पुलिसने इन खालिस्तानी आतङ्कियोंको उस समय पकडा, जब वे शस्त्र क्रयकर लौट रहे थे । पूछताछमें उन्होंने बताया कि वे दो शिवसेना नेताओंपर (सुधीर सूरी और गुरशरणमंद) आक्रमणकी योजना बना रहे थे” । वह ‘फेसबुक’केद्वारा ‘SFJ’के गुरमीत सिंहसे लगातार सम्पर्कमें थे । गुरमीत सिंहने इन दोनोंको उनके कट्टरपन्थी विचारोंके कारण योजनामें सम्मिलित किया था । गुरमीत सिंहने दोनोंको शस्त्र क्रय करनेके लिए ‘MoneyGram’से पैसे भेजे थे । दोनों खालिस्तानी आतङ्कियोंको ‘यूएपीए’की धारा १० और १३, ‘आर्म्स एक्ट’की धारा २५, ५४, ५९ और ‘आईपीसी’की ‘धारा १२० बी’के अन्तर्गत बन्दी बनाया है ।
     ‘SFJ’के इन दो आतङ्कियोंको ऐसे समयमें बन्दी बनाया गया है, जब किसान आन्दोलनमें इस प्रतिबन्धित सङ्गठनकी घुसपैठको लेकर आशंकाएं प्रकट की जा रही हैं ।
     पिछले कुछ समयमें ऐसे कई प्रकरण सामने आए थे, जिससे यह स्पष्ट था कि किसान आन्दोलनपर खालिस्तानी तत्वोंका अधिकार हो चुका है और इससे देशकी आन्तरिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है ।
     कई खालिस्तानी आतङ्की किसानोंके वेषमें प्रदर्शन स्थलपर पहुंचे और इन्दिरा गांधीकी हत्याके विषयपर अपनी पीठ थपथपाते हुए दृष्टिगोचर हुए । इसके अतिरिक्त वे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको भी धमकी देते हुए दिखे और कहा कि किसानोंकी मांग पूर्ण नहीं हुई तो उनकी भी वही स्थिति होगी ।
       किसानोंके छद्मरूपमें उपद्रवियोंने आन्दोलनको अधिकारमें ले लिया है; अतः शासनको इनका अभिज्ञानकर इनको कठोर दण्ड देना चाहिए, नहीं तो ये लोग देशकी आन्तरिक सुरक्षामें बाधा उत्पन्न कर सकते हैं व उपद्रव बढनेसे अपार जनहानि हो सकती है । ऐसे सङ्गठनोंको पूर्णरूपेण प्रतिबन्धित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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