जून २६, २०१८
कर्नाटकमें एक महाविद्यालयने ‘हिजाब’पर प्रतिबन्ध लगा दिया । छात्र-छात्राओंके मध्य जैसे ही यह आदेश आया, उनका क्रोध भडक गया । सोमवारको (जून २५) इसी सन्दर्भमें मेंगलुरू स्थित ‘सेण्ट एग्नेस महाविद्यालय’के बाहर मुस्लिम छात्राओंने विरोध प्रदर्शन किया । आक्षेप है कि महाविद्यालय प्रबन्धनने कक्षाओंके अन्दर उनके ‘हिजाब’ पहननेपर प्रतिबन्ध लगा दिया है । ‘कैम्पस फ्रण्ट ऑफ इण्डिया’ नामक संगठनका इस प्रकरणपर कहना है, “‘हिजाब’ हमारे अभिमानको दर्शाता है, यह हमारी रक्षा करता है, आप उसे हटाने वाले कौन होते हैं ?”
फातिमा नामकी छात्राने प्रश्न किया, “हमें अबसे इस वर्ष महाविद्यालयमें ‘हिजाब’ नहीं पहनने दिया जाएगा ! हमारा संविधान और शासन जब हमें उसे पहननेकी स्वतन्त्रता देते हैं, तब महाविद्यालय यह अधिकार कैसे छीन सकता है ? ऐसेमें सभी मुस्लिम छात्राएं तबतक कक्षाएं नहीं लेंगी, जबतक संस्थान अपने निर्णयको वापस नहीं लेता ।”
फातिमाने बताया कि एक ओर तो संस्थान धर्म निरपेक्षताकी बात करता है, जबकि दूसरी ओर वह इस तरहके आदेश सुनाता है । वहीं, ‘कैम्पस फ्रण्ट ऑफ इण्डिया’की राज्य इकाईसे सम्बन्धित रियाजने कहा कि मुस्लिम छात्राओंका एक प्रतिनिधिमण्डल दो दिवस पूर्व इस प्रकरणको लेकर प्राचार्यसे मिला था, ताकि शान्तिपूर्ण ढंगसे इसे हल किया जा सके; यद्यपि, प्राचार्य या फिर अन्य कर्मियोंमें किसीने भी छात्राओंसे बात नहीं की । सोमवार सुबह छात्राओंने अध्यापकोंसे भी इस बारे में बात करनी चाही, परन्तु उन्होंने अधिक व्यस्त होनेकी बात कहकर छात्राओंको भेज दिया ।
इस प्रकरणके मध्य संस्थानने कहा है कि हर छात्रका सम्मान करनेके लिए वह आदेश दिया है । महाविद्यालयके अनुसार, “‘सेण्ट एग्नेस महाविद्यालय’ अल्पसंख्यकोंके लिए शैक्षणिक संस्थान, जो कि मुस्लिम महिलाओंपर अधिक बल देता है । हम प्रत्येक छात्रका सम्मान करते हैं । प्रबन्धनने कुछ नियम बनाए हैं, ताकि चीजें सही प्रकारसे चलें । नियमानुसार, छात्राओंको कक्षाओंके अन्दर ‘हिजाब’ नहीं पहनने दिया जाएगा !; यद्यपि हमें इसपर कोई परेशानी नहीं है कि वे महाविद्यालयके बाहर ‘हिजाब’ पहनें । प्रवेशसे पूर्व छात्र-छात्राओं व अभिभावकोंको इस नियमसे अवगत करा दिया जाता है, फिर भी कुछ छात्रोंने इसे लेकर प्रदर्शन किया, यदि किसी छात्रको परेशानी है तो प्रबन्धन उसकी समस्याका हल निकालेगा !”
स्रोत : जनसत्ता
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