धार्मिक संरचनाओंकी सुरक्षा हेतु कर्नाटक विधानसभामें विधेयक हुआ पारित


२४ सितम्बर, २०२१
      कर्नाटकके मैसूर जनपदमें गत १० सितम्बरको एक मन्दिरको क्षतिग्रस्त करनेकी कार्यवाहीके कारण उत्पन्न हुए आक्रोशको देखते हुए अब कर्नाटक शासननें सर्वोच्च न्यायालयके २००९ के आदेशको निष्प्रभावी बनाने हेतु नवीन विधेयक लानेका निर्णय लिया है । इसीके अन्तर्गत मंगलवार २१ सितम्बर, २०२१ को विधानसभामें कर्नाटक ‘रिलीजियस स्ट्रक्चर’ विधेयक २०२१ को पारित किया गया । इस विधेयकका उद्देश्य शीर्ष न्यायालयके आदेशोंकी पृष्ठभूमिमें राज्यमें धार्मिक संरचनाओंपर उत्पन्न कार्यवाहीपर अंकुश लगाना होगा । वहीं सदनमें विधेयकको प्रस्तुत करते हुए मुख्यमन्त्री बासवराज बोम्मईने कहाकि इस विधेयकका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानोंपर धार्मिक स्थलोंकी रक्षा करना है, जिससे सामुदायिक सद्भाव व लोगोंकी धार्मिक भावनाओंको ठेस न पहुंचे । उन्होंने यह भी कहा कि भविष्यमें इस विधेयकके अनुसार  अब सार्वजनिक स्थानोंपर किसीभी धार्मिक संरचनाके निर्माणकी अनुमति नहीं दी जाएगी । विधेयक सदनमें सर्वसम्मतिसे पारित कर दिया गया; परन्तु विपक्षने शासनपर यह आरोप लगाया कि विधायकको अति शीघ्रतासे लाया गया है । विधानसभामें राज्य शासनने इस बातको स्वीकार करते हुए कहा कि मैसूरमें मन्दिरपर हुई कार्यवाहीकी जानकारी उन्हें नहीं थी एवं उच्च न्यायालयके आदेशको लागू करनेके लिए ‘अति उत्साहित’ अधिकारियोंने शासनको बिना बताए ही मन्दिरको क्षतिग्रस्त कर दिया ।
       शासनद्वारा पारित किए जा रहे ऐसे विधेयकोंका आना सुखद है और यह भी हिन्दुओंके विरोधके कारण सम्भव हो पाया है; तथापि जिस प्रकारकी परिस्थितियां भारतमें निर्मित हो रही हैं, उन्हें देखते हुए यह स्पष्ट है कि अब हिन्दुओंको ही आगे आकर अपने मन्दिरोंकी स्वयं रक्षा करनी होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution