‘केवल ‘मजहबी तालीम’से (जिहादी शिक्षा) नहीं चल सकता जीवन’, कर्नाटकके मदरसोंमें आधुनिक शिक्षापर विवाद
१३ फरवरी, २०२१
भाजपा शासित कर्नाटकमें मदरसोंकी शिक्षाको आधुनिक बनानेके प्रस्तावपर विवाद छिड गया है । इस सम्बन्धमें राज्यके अल्पसङ्ख्यक कल्याणमन्त्री श्रीमंत पाटिलकी एक टिप्पणीसे विवाद उत्पन्न हो गया है । उन्होंने कहा कि ‘मजहबी’ (साम्प्रदायिक) शिक्षासे बच्चोंका जीवन नहीं चल सकता; इसलिए शासन मदरसोंमें शिक्षाको तर्कसंगत करनेपर विचार कर रहा है ।
मुसलमान समुदायके कुछ नेताओंने इसका स्वागत किया है, वहीं अनेकने इसपर चिन्ता व्यक्त की है । ऐसे लोगोंका आरोप है कि मदरसोंपर प्रदेश शासन नियन्त्रण करना चाहता है ।
‘टाइम्स नाउ’के अनुसार, मंगलुरुमें बोलते हुए श्रीमंत पाटिलने कहा कि कर्नाटकमें सहस्रों मदरसे हैं । मदरसोंमें आनेवाले बच्चोंको केवल ‘मजहबी तालीम’ दी जाती है । इसका उनके भविष्यमें कोई उपयोग नहीं है । ऐसी शिक्षासे न तो उनके कौशलका विकास होता है और न ही वह ‘रोजगार’के सहायक बनते हैं ।
कर्नाटकके अल्पसङ्ख्यक कल्याण मन्त्रीने कहा, “हमारी योजनाके अन्तर्गत एक मानक पाठ्यक्रम (standard syllabus) बनाया जाएगा । इसके अन्तर्गत बच्चोंको ‘SSLC’के (सेकेंड्री स्कूल लीविंग) स्तरका प्रमाणपत्र दिया जाएगा । इसकी सहायतासे छात्रोंको विश्वविद्यालयमें प्रवेश लेनेमें या अन्य पाठ्यक्रमोंका चुनाव करनेमें सहायता होगी । पन्थिक शिक्षासे उनका जीवन निर्वाह नहीं हो सकता है; इसलिए यह पग अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है और इसके लिए हमने अल्पसङ्ख्यक समुदायके लोगोंसे वार्ता भी आरम्भ कर दी है । हमें इस विषयपर अत्यन्त सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं ।”
कर्नाटक शासनद्वारा यह एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पग है, जो बहुत अच्छा है । मदरसोंकी शिक्षाद्वारा जिहादकी स्थिति उत्पन्न होती है, जो अत्यन्त ही हानिकारक है; अतः कर्नाटक शासनको इस प्रकारके कार्यके लिए साधुवाद है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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