१५ दिसम्बर, २०२०
कर्नाटक उच्च न्यायालयने सोमवार, १४ दिसम्बरको उन रिट याचिकाओंको बहिष्कृत कर दिया, जिसमें ऐसे निर्देशकी याचना की गई थी कि गैर हिन्दुओंको कर्नाटक हिन्दू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बन्दोबस्ती विभाग ‘KHRICE’के अन्तर्गत आयुक्तोंके कार्यालयमें कार्य करनेकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए । पीठने सुनवाईके अन्तराल कहा कि हम ऐसी याचिकापर विचार नहीं कर सकते, जो हमें सौ साल पीछे ले जाती हो ।
याचिकाओंमें कर्नाटक हिन्दू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बन्दोबस्ती अधिनियमकी धारा ७ को सख्तीसे लागू करनेकी याचना की गई, जिसमें यह याचनाकी गई कि कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू धर्मको स्वीकार नहीं कर रहा है, उसे उक्त अधिनियमके तहत नियुक्त आयुक्तके कार्यालयमें कार्य करनेकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए ।
इनमेंसे एक याचिका एनपी अमृतेशने महालिंगेश्वर मन्दिरद्वारा आयोजित वार्षिकोत्सवके निमन्त्रण पत्रपर एबी इब्राहिम, जो हिन्दू धार्मिक संस्थानों और धर्मार्थ बन्दोबस्त विभाग मंगलुरुमें डिप्टी कमिश्नरके रूपमें कार्य कर रहे थे, नामपर प्रश्न उठाते हुए दायरकी थी ।
न्यायालयने कहा कि क्या आसमान टूट पडेगा यदि वो मन्दिरमें प्रवेश करेंगे ? पीठने कहा कि हिन्दू धर्म कभी इतना संकीर्ण नहीं था । पीठने कहा, “देशमें कहीं भी चले जाइए, ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां बडे हिन्दू त्योहारोंमें ऐसे सरकारी अधिकारियोंने प्रशासनकी सहायताकी, जो हिन्दू धर्म स्वीकार नहीं करते ।”
न्यायालयसे इसी निर्णयकी अपेक्षा की जा सकती है; क्योंकि आजके न्यायदाताओंकी बौद्धिक क्षमता इतनी ही है, तभी तो हिन्दू राष्ट्र ही चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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