कासगंजमें उत्तर प्रदेश पुलिसपर आक्रमणमें ‘कॉन्स्टेबल’की मृत्यु
११ फरवरी, २०२१
उत्तर प्रदेशके कासगंजमें मंगलवार, १० फरवरीको बिकरु जैसी घटना हुई । मद्य व्यवसायीको बन्दी बनाने गई पुलिसपर निर्दयतासे आक्रमण किया गया । घटनामें एक पुलिसकर्मीकी हत्या कर दी गई । वहीं ‘सब इंस्पेक्टर’का शव अर्धनग्न अवस्थामें रक्तसे लथपथ सडकपर मिले ।
मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने इस प्रकरणपर संज्ञान लेकर आरोपियोंके विरुद्ध रासुका लगानेके निर्देश दिए । मृत पुलिसकर्मीके परिवारको ५० लाखकी सहायता व एक चाकरी देनेका आदेश दिया गया । दूसरी ओर पुलिसने कार्यवाहीके मध्य मुठभेडमें एक आरोपीको मार गिराया । ‘एनकाउंटर’में मारे गए व्यक्तिकी ‘पहचान’ मोती धीमरके भाई एलकारके रूपमें हुई ।
घटनाके प्रत्युत्तरमें मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने इस प्रकरणपर कहा, “राज्य शासन अपराध व अपराधियोंके प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’की नीतिपर कार्य कर रहा है । विधान व्यवस्थाके सम्बन्धमें किसी भी प्रकारका समझौता न करते हुए सम्बन्धित दोषियोंके विरुद्ध अविलम्ब व कडी कार्यवाही की जाए ।”
सम्पूर्ण प्रकरण सिढपुरा थानेका है । यहांसे दो पुलिसकर्मी ‘सब इंस्पेक्टर’ अशोक सिंह और सिपाही देवेंद्र ९ फरवरीको अवैध मद्यकी सूचना मिलनेपर जांचके लिए निर्देशित गन्तव्यपर पहुंचे थे; परन्तु मद्य व्यवसायियोंको इस बातकी सूचना हो गई ।
पहले उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियोंको बन्धक बनाकर पीटा, तदुपरान्त उनकी वेशभूषा फाडकर उनसे उनके शस्त्र छीन लिए । इसके पश्चात पुलिसकर्मीको मार्गमें फेंक दिया गया व अन्य पुलिसकर्मीको अपने साथ लेकर चले गए ।
गुण्डाराज उत्तर प्रदेशका राजधर्म रह चुका था और योगीजी इसपर कार्य अवश्य कर रहे हैं; परन्तु उन्हें भी अपनी गति बढानेकी आवश्यकता है और ऐसे प्रकरणमें पुलिसको और अधिकार दिए जानेकी आवश्यकता है, जिससे इस प्रकारकी दुर्घटनाएं न हों । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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