कश्मीरकी ‘स्वतन्त्रता’ असम्भव, वार्ता ही एकमात्र आशा: सैफ़ुद्दीन सोज


जून २५, २०१८

कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोजने पाकिस्तानके पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफके एक विचारके समर्थनकी बातसे पलटते हुए सोमवारको कहा कि कश्मीरकी ‘स्वतन्त्रता’ सम्भव नहीं है और इसे भारतीय संविधानके अन्तर्गत अपने साथ समाहित करना होगा । उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर भारतको पहचाननेकी प्रयोगशाला है और हिंसासे कोई समाधान नहीं निकलेगा !; बल्कि वार्ताकी एकमात्र उम्मीद है ।

अपनी पुस्तक ‘कश्मीर: गिलम्पसेज ऑफ हिस्ट्री एण्ड द स्टोरी ऑफ स्ट्रगल’में विमोचनके अवसरपर पूर्व केन्द्रीय मन्त्रीने यह भी कहा कि कश्मीरके हल हेतु दो अवसर छूट गए ! प्रथम अवसर अटल बिहारी वाजपेयीके समय और द्वितीय मनमोहन सिंहके समय था ।

सोजने कहा, ‘मैं मुशर्रफके विचारका समर्थन नहीं करता । यह सब समाचार माध्यमोंने कर दिया । मुशर्रफने स्वयं अपने अधिकारीसे कहा था कि कश्मीरकी स्वतन्त्रता सम्भव नहीं !’ सोजकी इस पुस्तकके सन्दर्भसे एक समाचार माध्यमोंमें कहा गया था कि उन्होंने परवेज मुशर्रफके उस कथनका भी समर्थन किया है कि कश्मीरके लोग भारत या पाकके साथ जानेकी अपेक्षा एकाकी और स्वतन्त्र रहना चाहेंगे !

भाजपा अध्यक्ष अमित शाहके एक कथनका सन्दर्भ देते सोजने हुए कहा कि ‘स्वतन्त्रता सम्भव नहीं; लेकिन भारतीय संविधानके अन्तर्गत कश्मीरको समाहित (अकोमोडेट) करना होगा ।’

उन्होंने आज फिर कहा, ‘‘यह मेरी पुस्तक है, इसका कांग्रेससे कोई लेना-देना नहीं है । इसके लिए मैं उत्तरदायी हूं । इसमें मैने तथ्य सामने रखे हैं । मैंने शोध किया, बहुत अच्छी तरह शोध किया गया है ! कांग्रेसको कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए ।’ सोजने कहा, “जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल दोनों भारतके महान सपूत थे; लेकिन दोनोंके शैलीमें अन्तर था । दोनों भारतको शक्तिशाली बनाना चाहते थे ।”

पूर्व केन्द्रीय मन्त्री अरुण शौरीने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’को ‘फर्जीकल स्ट्राइक’ बताते देते हुए आक्षेप किया कि चीन, पाकिस्तान और बैंकको लेकर मोदी शासनके पास कोई नीति नहीं है । इस अवसरपर शौरीने कहा कि केवल हिन्दू-मुसलमानके मध्य दूरी पैदा करके, राजनीतिक लाभ लेनेका प्रयास किया जा रहा है ।

स्रोत : जी न्यूज



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