दिसम्बर १५, २०१८
जम्मू-कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने कहा है कि पाकिस्तान आने-जानेके लिए जिस प्रकार पंजाबकी सीमा खोली गई है, ठीक उसी प्रकार कश्मीरकी सीमा भी खोली जाए ! उन्होंने कहा कि जब हम पाकिस्तानका नाम लेते हैं तो हमें भारत विरोधी बताया जाता है, परन्तु यह सत्य है कि बिना पाकिस्तानसे चर्चाके कश्मीर समस्याका समाधान निकालना कठिन है ।
मुम्बईमें ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’की ओरसे आयोजित ‘द वे फॉरवर्ड’ कार्यक्रममें उन्होंने कहा कि दिवंगत बीजेपी नेता और पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयीने वर्ष २००२ में वार्ता आरम्भ की थी, परन्तु वह वार्ता किसी अन्तिम परिणामपर नहीं पहुंच सकी । वर्ष २०१४ में केन्द्रमें बीजेपीका पूर्ण बहुमत वाला शासन बननेसे बडी आशाएं थी कि कश्मीर समस्याका समाधान निकलेगा ।
उन्होंने बीजेपीपर लक्ष्य साधते हुए कहा, ‘प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीपर हमने विश्वास दिखाते हुए सत्तामें गठबन्धन किया था, किन्तु मोदीने चर्चाका रास्ता नहीं अपनाया ।’ उन्होंने बल देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीरकी तुलना देशके अन्य राज्योंसे नहीं की जा सकती । कश्मीरकी समस्या भिन्न है । मुस्लिम बहुल राज्य होनेके कारण पडोसी देशसे वहां कट्टरवादको बल देनेका कार्य किया जाता है । पाकिस्तानके नूतन प्रधानमन्त्री इमरान खानने चर्चाके लिए सकारात्मक भूमिका अपनाई है और इसे लेकर अपने देशको भी विचार करना चाहिए ।
महबूबाने कहा कि कश्मीर समस्याके समाधानके लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठनके देशोंको प्राथमिकता करते हुए कश्मीरके कारण भारत और पाकिस्तानके मध्य उपजे तनावको दूर करना चाहिए । साथ ही दक्षिण एशियाको जोडने वाला मार्ग कश्मीरके मध्यसे होकर गुजरना चाहिए । इससे क्षेत्रमें रोजगार उपलब्ध होनेमें सुविधा होगी ।
पूर्व मुख्यमन्त्री मेहबूबा मुफ्तीने कहा कि पीडीपी प्रत्येक सम्भव प्रयास किया कि कश्मीरी पण्डित एक बार पुनः कश्मीर लौट आएं । उनका कश्मीर छोडना कश्मीरके हितमें नहीं है, बल्कि उनके जानेसे कश्मीरी जनताको हानि हुई है । कश्मीरकी शिक्षा, संस्कृति और कुटीर उद्योगमें पण्डितोंका योगदान बहुत बडा योगदान रहा है ।
“कश्मीरसे सटी पाकिस्तान सीमाको खोलनेकी बात वही कर सकता है, जिसे या तो वहांका पूर्ण ज्ञान न हो अथवा उसका उद्देश्य कुछ और ही हो ! महबूबा वहांके परिपेक्षसे पूर्णतया परिचित हैं तो क्या वे सीमा खुलवाकर राष्ट्रको एक बडे संकटमें डालना चाहती हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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