मार्च २३, २०१९
कश्मीरके हाजिनमें मुठभेडके समय १२ वर्षीय आतिफ मीरकी हत्या कर दी गई, जिसे आतंकियोंने बंधक बना लिया था । आतंकियोंने पहले तो उसे ढालके रूपमें प्रयोग किया, तत्पश्चात तालिबानी ढंगसे गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी !!
प्रकरणसे सम्बन्धित एक वीडियो सामाजिक जालस्थलपर प्रसारित हो रहा है । इस वीडियोमें एक वृद्ध लश्कर-ए-तैयबाके दो आतंकवादियोंसे आतिफ मीरको मुक्त करनेकी विनती कर रहा है । वो आतंकियोंसे कहता है कि वो जो कुछ भी कर रहा है, वो ‘जिहाद’ नहीं, ‘जहालत’ है; परन्तु आतंकियोंपर इसका कोई प्रभाव नहीं पडता है ।
पुलिस अधिकारियोंने बताया कि यह घटना श्रीनगरसे ३३ किमी दूर हाजिनके मीर मोहल्लामें हुई, जहां आतंकवादियोंने बंदूकका भय दिखाकर बच्चेके घरमें आश्रय लिया था । उन्होंने बताया कि आतंकवादी उसकी बहनसे बलपूर्वक विवाह करना चाहता था; परन्तु परिवारवाले उसे भगानेमें सफल रहे । इससे विक्षिप्त आतंकियोंने आतिफ और उनके एक वृद्ध सम्बन्धी हमीद सहित परिवारके सदस्योंको पीटना आरम्भ कर दिया ।
परिवारके चिल्लानेकी आवाज सुन स्थानीय लोगोंने पुलिसको इसकी जानकारी दी, जिसके पश्चात पुलिसने परिवारको बचानेका कार्य आरम्भ किया । आतंकवादियोंके उनपर आक्रमण करनेतक आतिफके माता-पिता और परिवारके अन्य सदस्योंको बचा लिया गया; परन्तु बच्चा और उसके चाचा अब्दुल हमीद भीतर ही रह गए । बादमें पुलिस हमीदको बाहर निकालनेमें सफल हो गई; परन्तु बच्चेको नहीं बचा पाई ।
पुलिसने बताया कि आतंकवादियोंपर दबाव बढनेपर उन्होंने आतिफकी हत्या कर दी, जिसके पश्चात पुलिसने अभियान तीव्र कर दोनों पाकिस्तानियोंको मार गिराया । पुलिसके एक प्रवक्ताने कहा कि लश्कर-ए-तैयबाके दो आतंकवादी हाजिन मुठभेडमें मारे गए ।
“क्या ऐसे प्रकरणके पश्चात भी कश्मीरी इन नृशंस पैशाचिक वृत्तिके आतंकियोंका साथ देंगें ? जिहादी जिहादी ही रहता है । एकबार बुद्धिमें विष भरता है तो वह अपना-पराया आदि नहीं देखता है और वृद्ध जिस जिहाद और जहालतकी बात कर बालकको छोडनेको कह रहा है, उस परिभाषाको समझते-२ तो आज समूचा विश्व इस्लामसे त्रस्त हो चुका है ! अब यदि कश्मीरको इन सबसे मुक्ति पानी है तो इस परिभाषावाली पुस्तकसे मुक्ति पानी होगी और स्वयं इसका विरोध करना होगा और इस्लामकी यही सत्यता है कि प्रथम वे अन्योंको मारते हैं और उसके पश्चात स्वयं लडते-मरते हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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