नवम्बर १६, २०१८
कश्मीर घाटीमें गत दो वर्षोंके मध्य सक्रिय हुए स्थानीय आतंकियोंमें लगभग सात पारपत्र (पासपोर्ट) और वीजाके आधारपर पाकिस्तान अपने सम्बन्धियोंसे मिलने गए, लेकिन जब वापस आए तो जिहादी बनकर ! सुरक्षा विभागकी मानें तो केवल यही सात नहीं, कई ऐसे युवक जो शिक्षा-रोजगारके लिए विदेश या देशके विभिन्न भागोंमें गए, वे आतंकी बनकर लौटे ! विशेषतया पाकिस्तान, बांग्लादेश, दुबई, ईरान, इराक, थाईलैंड, मलेशिया और कुछ अफ्रीकी देशोंको जाने वाले कश्मीरी युवकोंके बारेमें सुरक्षा विभागोंने खोज आरम्भ कर दी है । इन देशोंमें जिहादी तत्वोंका एक सशक्त जाल है ।
दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, महाराष्ट्र और पंजाबके विभिन्न नगरोंमें शिक्षाके लिए गए कश्मीरी युवकोंके बारेमें भी गहनतासे जांच की जा रही है । उप्र, बिहार, केरल, महाराष्ट्र व गुजरातके मदरसोंमें जाने वाले युवकोंके बारेमें भी ज्ञात किया जा रहा है । एक अधिकारीने कहा, जालंधरमें पुलिस थानेपर आक्रमण और एक अभियान्त्रिकी महाविद्यालयमें पढने वाले छात्रोंके ‘अंसार-उल-गजवा-एर्-ंहद’से जुडे होनेके पश्चात कश्मीरी युवकोंपर दृष्टि है ।
अधिकारीने बताया कि विदेश जाकर वहां आतंकी प्रशिक्षण लेने वाले ये आतंकी तत्व तब तक बचे रहते हैं, जब तक वह स्वयं सक्रिय नहीं होते । सक्रिय होनेसे पूर्व वह अपना एक सशक्त नेटवर्क तैयार करनेमें लगे रहते हैं । कई नए युवकोंको आतंककी राहपर धकेल चुके होते हैं ।
बारामुलामें सुरक्षाबलोंके लिए सिरदर्द बना लश्कर ए तैयबाका मुखिया सुहैब अखून भी लगभग दो वर्ष पहले तक एक सामान्य युवक था । वह पारपत्र (पासपोर्ट) और वीजा लेकर पाकिस्तान गया था । वहां कुछ समय अपने रिश्तेदारोंके पास रहा और जिहादी तत्वोंके साथ सम्पर्कमें आ गया । इसके पश्चात जब वह कश्मीर लौटा तो एक कट्टर जिहादी बनकर !
सम्बन्धित अधिकारियोंने बताया कि इस समय भी कश्मीरमें ऐसे सात स्थानीय आतंकी सक्रिय हैं, जो गत दो वर्षोंके मध्य पारपत्र (पासपोर्ट) लेकर पाकिस्तान गए हैं । इनके अतिरिक्त सोपोरके चार और कुलगामका एक आतंकी गुलाम कश्मीरमें पहले से उपस्थित कश्मीरी आतंकियोंके साथ जिहादी प्रशिक्षण ले रहे हैं । इनमें बराथ कलांका मोहम्मद उमर मीरए वारीपोराका (कुलगाम) मोहम्मद उमैर बट भी सम्मिलित है ।
पाकिस्तानसे लौटे ऐसे ही दो युवकों अब्दुल मजीद बट और मोहम्मद अशरफ मीरको इसी वर्ष राज्य पुलिसकी सूचनापर पंजाब पुलिसने वाघा बार्डरपर पकडा था । इनसे पूर्व कश्मीर घाटीके कुपवाडा जनपदके निवासी अजहरुदीन व सज्जाद अहमद फरवरी २०१७ में पारपत्रपर पाकिस्तान गए थे । ये दोनों भी बादमें आतंकी बने और सुरक्षाबलोंके साथ सोपोरमें हुई मुठभेडमें मारे गए थे । इसी वर्ष मई माहके मध्य टंगडार क्षेत्रमें मारे गए दो आतंकी शिराज अहमद निवासी लाजूरा (पुलवामा) और मुदस्सर अहमद निवासी परिगाम भी कथित रूपसे पारपत्र लेकर ही पाकिस्तान गए थे !
जांच विभागके एक अधिकारीने बताया कि पारपत्र (पासपोर्ट) और अनुमति-पत्रके (वीजा) लिए आवेदन करने वाले कश्मीरी युवकों व देशके विभिन्न भागोंमें पढ रहे छात्रोंका पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है । इसमें उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमिके साथ यह भी ज्ञात किया जा रहा है कि वह कभी पत्थरबाजीमें या फिर किसी अन्य अवैधानिक गतिविधिके प्रकरणमें पूछताछके लिए बुलाए गए हैं या नहीं ? सामाजिक प्रसार माध्यमपर उनके फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पेजोंको भी खंगाला जा रहा है । उनके चलभाष क्रमांकोंकी भी छानबीन हो रही है ।
“शासनसे अपेक्षा है कि वह मूलपर प्रहार करें, क्योंकि आतंकका बीज तो बालपनमें ही बो दिया जाता है, जिसे आतंकी संगठन केवल बडा कर वृक्ष बनाते है । मदरसोंपर व मस्जिदोंपर आतंकी प्रशिक्षण देनेके अनेकानेक प्रकरण उजागर हो चूके हैं, फिर भी हम कार्यवाही करनेके स्थानपर सतही उपाय योजना बना रहे हैं, यह हास्यास्पद है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : दैनिक जागरण
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