यदि साधना करनेसे अनिष्ट शक्तियां मुझपर अनिष्ट प्रभाव डाल रही हे और मेरे सारे कार्य खराब कर रही है, तो क्या कुछ समयके लिए साधना बंद कर देनी चाहिए ? – अभिषेक, पुणे


नम्र विनती है कि कृपया अपना पूरा नाम लिखा करें | साधना करनेसे अनिष्ट शक्तियां कभी भी अनिष्ट नहीं कर सकती हैं और साधना तो किसी भी स्थितिमें कभी भी बंद नहीं करनी चाहिए | साधना आरम्भ करनेपर मन आनंदी हो जाता है, कष्ट न्यून हो जाते हैं और हम अध्यात्मके उत्तरोतर चरणोंको साध्य करने लगते हैं ! साधना आरम्भ करनेपर कुछ समय आपको तभी कष्ट हो सकता है यदि आपके घरमें तीव्र पितृदोष हो (आज समाजके ७० % लोगोंको मध्यमसे तीव्र पितृदोष है), या अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट हो ! यदि ऐसा हो रहा है तो आप अपनी साधना कदापि न छोडें, इसका अर्थ है कि आपकी साधनाकी दिशा योग्य है; किन्तु अनेक वर्ष साधना करनेपर भी न आपको कोई अनुभूति होती हो और न ही कष्ट न्यून हो रहा हो तो समझ लें कि साधनाकी दिशा योग्य नहीं है; अतः किसी सन्तसे मार्गदर्शन लें या अध्यात्मशास्त्र अनुसार साधना करें !     यदि आपको कष्ट है तो साधना आरम्भ करनेपर अनिष्ट शक्तियां भयभीत होकर या अतृप्त पितर चिढ़कर आपको कुछ कालतक कष्ट दे सकती हैं, ऐसेमें नामजपके साथ सेवा करें, वह भी किसी सन्तके शरणमें या उनके कार्यमें सहयोग देकर ! हमारे श्रीगुरुके अनुसार नामजपका महत्त्व ५ % और नामजपके साथ सेवाका महत्त्व १०० % है | तीव्र कष्टमें नामजप, पूजा-पाठ इत्यादिसे विशेष लाभ नहीं होता है, इस हेतु किसी सन्तके कार्यमें तन, मन, धन और बुद्धिसे यथाशक्ति सेवा करें ! इससे सन्तका संकल्प कार्यरत होता है एवं अनिष्ट शक्तियोंको गति मिलनेसे कष्ट न्यून हो जाता है ! और यदि किसीको शारीरिक और मानसिक या आध्यात्मिक कष्ट हो तो उन्होंने दोष निर्मूलन अवश्य ही करना चाहिए क्योंकि वर्तमान कालमें अनिष्ट शक्तियोंका प्रिय स्थान लोगोंका घर एवं उनका देह और मन होता है, इसकी शुद्धि बिना कष्टका अन्त संभव नहीं ! 



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution