जुलाई १०, २०१८
कश्मीरमें इस वर्ष अबतक ८२ युवकोंने आतंकवादकी राह अपनाई है । सेनाके जवान अब घाटीमें बच्चोंके सम्बन्धियोंको यह सन्देश दे रहे हैं कि आतंकवादकी राहका केवल एक लक्ष्य है और वह है मृत्यु; इसलिए वो अपने बच्चोंसे आतंकका रास्ता छोडनेके लिए कहें ! सुरक्षाबलोंने इस मध्य बडी संख्यामें आंतकवादियोंका आत्मसमर्पण भी कराया है । बता दें कि इसी समयमें सुरक्षाबलोंने १०१ आतंकवादियोंको मारा है ।
आतंकवादी बनने वालोंमें सबसे अधिक दक्षिण कश्मीरके पुलवामा और शोपियांके युवाओंकी है, जहांसे २०-२० युवकोंने यह राह पकडी । मंगलवारको शोपियांमें एक भिडन्तमें दो आतंकवादी मारे गए ! दोनों ही स्थानीय थे और केवल दो माह पूर्व ‘हिजबुल मुजाहिदीन’में प्रविष्ट हुए थे । इनमें से एक आतंकवादीके सुरक्षा बलोंके पाशमें फंसनेका समाचार मिलनेके पश्चात उसके पिताको हृदयाघात आया और उनकी भी मृत्यु हो गई ।
नूतन युवकोंको आतंकके संकटमें फंसानेके लिए मृत आतंकवादियोंके अन्तिम संस्कारका अवसर सबसे अधिक प्रयोग होता है । इस मध्य स्हस्त्रों लोग एकत्र होते हैं और किशोरोंको आतंकसे जुडनेकी प्रतिज्ञा दिलाई जाती है । इसके कुछ ही दिवसोंमें आतंकवादी उसे अपने साथ ले जाते हैं और प्रशिक्षण देकर आतंकमें धकेल देते हैं । ऐसे में वो सुरक्षा बलोंके आसान लक्ष्य बन जाते हैं; यद्यपि, सुरक्षा बल भिडन्तके समय भी ऐसे युवकोंकी उनके घरवालोंसे बात कराकर शस्त्र डालनेके लिए सज्ज करते हैं । कई बार इनके अच्छे परिणाम भी निकले हैं ।
इस वर्ष अभीतक अप्रैलके माहमें सबसे अधिक २५ युवकोंने आतंकका मार्ग चुना । विशेषज्ञोंके अनुसार एक अप्रैलको शोपियां और अनन्तनागमें भिडन्तमें कुल १३ आतंकवादी मारे गए थे । इसके पश्चात हुए अंतिम संस्कारोंका प्रयोग आतंकवादियोंने अपने प्रवेश बढानेके लिए किया । सेनाके सूत्रोंके अनुसार नए बच्चोंको प्रशिक्षणके नामपर केवल ‘एके-४७’से कुछ गोलीबारी ही कराई जाती हैं । आतंकी इसके पश्चात शस्त्रोंके साथ उसका चित्र जारी कर देते हैं, जिससे उसकी वापसीका मार्ग बन्द हो जाता है ।
सीमापर सुरक्षाकी कडी घेरेबन्दीके कारण इस समय आतंकवादियोंके पास शस्त्रोंकी कमी हैं । सेनाके सूत्रोंके अनुसार बडी संख्यामें नूतन आतंकवादी प्रविष्ट होनेके साथ ही ये कमी बढेगी । इसका अर्थ यह है कि आने वाले दिनोंमें आतंकवादी शस्त्र छीननेका अधिक प्रयास करेंगे !
स्रोत : जी न्यूज
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