चलचगत्र ‘केदारनाथ’को प्रतिबन्धित करनेका प्रकरण उत्तराखंड उच्च न्यायालय तक पहुंचा !


दिसम्बर ५, २०१८

विवादोंसे घिरे चलचित्र ‘केदारनाथ’का प्रकरण अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है । उत्तराखण्डकी संस्कृति और परम्पराओंको ताकपर रखकर बने इस चलचित्रके प्रकाशित होनेपर उठे विवादके मध्य उच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की गई है ।


याचिकामें आरोप लगाया गया है कि भगवान केदारनाथका अपमान करते हुए विदेशी रुपयोंके दमपर चलचित्रका निर्माण किया गया है । याचिकाकर्ता स्वामी दर्शन भारतीने उच्च न्यायालयमें जनहित याचिका प्रविष्ट कर प्रार्थना की है कि चलचित्रमें पहाड सहित हिन्दुओंकी आस्था और विश्वासके साथ उपहास किया गया है !

चलचित्रमें दिखाया गया है कि केदारनाथमें सैकडों वर्षोंसे मुस्लिम समाजके लोग रहते हैं, जबकि वहां एक भी मुस्लिम या इस्लामिक परिवार नहीं रहता है । निर्माताने केदारनाथकी आपदाको लव-जिहादसे जोडकर आस्था और विश्वासपर कुठाराघात किया है !

चलचित्रमें लडका मुस्लिम और लडकी हिन्दू है और इनके विवाहको लेकर लडकी वाला परिवार कहता है कि यदि प्रलय भी आ जाएगा तो विवाह नहीं होगा । उन्होंने कहा कि चलचित्रके प्रसारणमें दिखाया गया है कि अभिनेता कहता है कि हमारे पूर्वज सदियोंसे केदारनाथमें रहते आ रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं हैं !

याचिकाकर्ताने बताया कि निरीक्षण मण्डलको (सेंसर बोर्डको) भी ज्ञापन भेज आपत्ति प्रविष्ट कर दी गई है । केदारनाथ देशके लिए मोक्ष धामके रूपमें प्रचलित है और जगत गुरु शंकराचार्यने भी चार धामकी स्थापनाके पश्चात यही शरीर त्यागा था ।

इससे आहत होकर हमने लोकतन्त्रके मंदिरमें केदारनाथकी आस्थाको बचानेकी मांग की है । उन्होंने ये भी बताया कि केदारनाथ और बद्रीनाथ मन्दिर समितिने भी याचिकामें साथ देते हुए कहा है कि चलचित्र निर्माणमें उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई है ! याचिका प्रविष्ट होनेके पश्चात अब इसपर शीघ्र सुनवाई होगी !

 

“चलचित्र निर्माता विदेशी धनसे हिन्दुओंके अस्थास्थानको आघात पहुंचाकर ही चलचित्र बनाते हैं, यह समय-समयपर उजागर हुआ है; ऐसेमें हिन्दुवादी शासन तन्त्रने इसपर त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए एवं हिन्दुओंने भी विवेक व बुद्धिका उपयोग कर इन निर्माताओंको पाठ पढाना चाहिए व ऐसे चलचित्रोंको देखना बन्द करना चाहिए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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