केन्द्र शासनने उच्चतम न्यायालयसे कडी टिप्पणियां करने से बचने को कहा


अगस्त ८, २०१८

केन्द्रने बुधवारको उच्चतम न्यायालयसे स्पष्ट कह दिया कि जनहित याचिकाओंपर वह कडी टिप्पणियां करनेसे बचे; क्योंकि इनका देशमें फैले कई प्रकरणपर प्रभाव होता है । यद्यपि, शीर्ष न्यायालयने पलटवार करते हुए कहा कि न्यायाधीश भी नागरिक हैं और देशके सामने खडी समस्याओंको जानते हैं । शीर्ष न्यायालयने स्पष्ट किया कि ‘‘ वे प्रत्येक प्रकरणके लिए शासनकी आलोचना नहीं कर रहे हैं ।’’ न्यायालयने शासनसे देशके विधानका पालन करनेके लिए भी कहा ।

उच्चतम न्यायालय और शीर्ष विधि अधिकारी महान्यायवादीके (अटार्नी जनरलके) मध्य शब्दोंका आदान-प्रदान उस समय हुआ, जब पीठ देशकी १३८२ जेलोंमें व्याप्त अमानवीय स्थितिसे सम्बन्धित एक प्रकरणकी सुनवाई कर रही थी । महान्यायवादी के के वेणुगोपालने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुरकी अध्यक्षता वाली पीठसे कहा कि वह शीर्ष न्यायालयकी आलोचना नहीं कर रहे हैं; लेकिन देशमें बहुत समस्याएं हैं और अतीत में, उसके आदेशों और निर्णयोंने ऐसी स्थिति पैदा की है, जिससे लोगोंको अपनी चाकरी (नौकरी) छोडनी पडी ।

उन्होंने ‘टूजी स्पेक्ट्रम’ आवण्टन मामलों और देशके राजमार्गोंके ५०० मीटरके भीतर शराबके विक्रयपर प्रतिबन्ध वाले आदेशसे सम्बन्धित जनहित याचिकाओंपर शीर्ष न्यायालयके निर्णयका वर्णन करते हुए कहा कि इनका विदेशी निवेशपर प्रभाव पडा और इसके बाद लोगोंकी नौकरियां चली गईं ! शीर्ष विधि अधिकारीने पीठको बताया कि देशमें कई समस्याएं हैं और न्यायालयको शासनद्वारा की गई प्रगतिपर भी ध्यान देना चाहिए । इस पीठमें न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी थे ।

न्यायमूर्ति लोकुरने उत्तर दिया, ‘‘हम इनमेंसे कुछ समस्याओंको सुलझानेका प्रयास कर रहे हैं” और उन्होंने विधवाओं, बच्चों और बन्दियोंके अधिकारोंसे सम्बन्धित प्रकरणका वर्णन किया, जिन पर शीर्ष न्यायालय विचार कर रहा है । न्यायाधीशने वेणुगोपालसे कहा, ‘‘हम भी इस देशके नागरिक हैं और हम देशके सामने उपस्थित समस्याओंको जानते हैं ।’’ महामान्यवादीने न्यायालयसे कहा कि हो सकता है कि किसी प्रकरणमें निपटते समय न्यायालयने उसपर ध्यान नहीं दिया हो, जो कुछ अन्य पहलुओं पर हो सकता हो ।

न्यायमूर्ति लोकुरने कहा, ‘‘हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हमने हर चीजके लिए शासनकी आलोचना न तो की है और ना ही कर रहे हैं !’’ उन्होंने कहा, ‘‘कृपया यह वातावरण मत बनाइए कि हम शासनकी आलोचना कर रहे हैं और उसे उसका कार्य करने से रोक रहे हैं । आप न्यायालयके सकारात्मक निर्देशोंकी ओर भी देखिए !’’

स्रोत : आजतक



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