केरलके गिरिजाघरने ‘लव-जिहाद’से रक्षण हेतु, प्रस्तुतकी हस्त-पुस्तक, ‘मौलवियों’को बताया ‘काला जादू’ करनेवाला


१६ सितम्बर, २०२१
      केरलमें ईसाइयोंको ‘लव-जिहाद’से रक्षण हेतु, गिरिजाघर संगठन बारम्बार अपने समुदायको, इसके सङ्कटको लेकर सतर्क करते आए हैं । इस प्रकरणमें कई ‘पादरियों’ने यह समझानेका प्रयास किया है कि कैसे ईसाई लडकियोंको भ्रमितकर, उन्हें मुसलमान लडकोंके माध्यमसे फंसाया जाता है । इसके पश्चात यह क्रम ‘आईएसआईएस’के आतङ्कवादीके रूपमें जाकर समाप्त होता है । ‘सिरो मालाबार गिरिजाघर’के पाला सूबाके बिशप मार जोसेफ कल्लारंगटकी टिप्पणियोंने इस तथ्यको उजागर किया है कि केरलके ईसाई युवा न केवल ‘लव-जिहाद’; अपितु ‘नारकोटिक्स जिहाद’के भी लक्ष्य बनाए जा रहे हैं ।   इस्लामी सङ्गठनोंद्वारा किए जा रहे ‘लव-जिहाद’के विरुद्ध, अपने समुदायको चेतावनी देते हुए, एक पुस्तिका प्रस्तुत की गई है, इसमें ‘लव-जिहाद’को नौ चरणोंमें प्रस्तुत किया गया है ।
      इसके अन्तर्गत, लडकियोंको व्यक्तियोंके साथ शारीरिक सम्पर्क या आकस्मिक मित्रताके विरुद्ध चेतावनी दी गई है । व्यक्तिगत वस्तुओं, उपहारों आदि साधारण वस्तुओंका प्रयोग भी उन्हें फंसानेके लिए किया जा सकता है ।
      गिरिजाघरकी ‘हैंडबुक’में बताया गया है कि ‘मौलवी’ ईसाई लडकियोंको पथभ्रष्ट करनेके लिए ‘काले जादू’का प्रयोग करते हैं । ‘काले जादू’को प्रयोग लडकियोंकी लेखनी, कर-वस्त्रों तथा उनके केशोंका उपयोग करके किया जाता है ।
        जिस प्रकार ‘मौलवी’ अपने ‘काले जादू’के हथकण्डे अपनाकर, अन्य पन्थोंकी बेटियोंका धर्म-परिवर्तन कर रहे हैं; उसी प्रकार‌ वे हिन्दू लडकियोंको भी नष्ट करनेमें संलग्न हैं । हिन्दू सङ्गठनोंको इनका पूर्णतः संवैधानिक रूपसे प्रतिकार करना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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