केरलमें १०० मलयाली ‘आईएसआईएस’में हुए सम्मिलित, उनमेंसे ९५ नागरिक थे मुसलमान 


२४ सितम्बर, २०२१
      केरलके मुख्यमन्त्री पिनाराई विजयनने बुधवारको एक पत्रकार सभामें प्रकरण उजागर किया । इस प्रकरणमें उन्होंने वक्तव्य देकर बताया कि २०१९ तक केरलसे १०० मलयालम भाषायी नागरिक ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित हो गए । ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित होनेवाले उन १०० मेंसे ९५ लोग मुसलमान ही थे ।  आतङ्कियोंकी प्रविष्टिपर बोलते हुए, विजयन पिनाराईने उजागर किया, “शासनने तथ्योंकी पुष्टि की है कि ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित होनेवाले १०० मेंसे ७२ लोग व्यवसायिक  उद्देश्योंके लिए विदेश गए थे; किन्तु ‘आईएसआईएस’की विचारधारासे आकर्षित हो गए और इसमें सम्मिलित हो गए । ७२ मेंसे केवल एक ही हिन्दू था, जब कि अन्य मुसलमान समुदायसे थे ।”
      उन्होंने आगे कहा, “अन्य २८ ने विचारधारासे आकर्षित होनेके पश्चात, विशेष रूपसे ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित होनेके लिए केरलको छोड दिया था । उन २८ मेंसे केवल पांचको अन्य धर्मोंसे मुसलमान ‘मजहब’में परिवर्तित किया गया था ।’
उल्लेखनीय है कि २०१९ के मीडियाके कई विवरणोंमें सुरक्षा संस्थानोंद्वारा ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित हुए केरलके लोगोंका अभिज्ञान तथा उनके चित्र भी देखनेमें आए थे ।
     आतङ्की समूह ‘आईएसआईएस’ चारों ओर आतङ्क फैलानेके लिए, निर्दोष लोगोंको अपने जिहादमें सम्मिलित करनेके लिए, उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जिसमें मुसलमानोंकी सङ्ख्या ही सर्वाधिक है । भारतमें रहते हुए भी, विशेष समुदाय आतङ्कियोंके समर्थक हैं । ऐसे लोगोंपर, शासनद्वारा कडी कार्यवाही की जानी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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