राष्ट्रीय राजमार्गपर धार्मिक स्थलोंको बचानेकी याचिका केरल उच्च न्यायालयने की अस्वीकृत
२५ जुलाई, २०२१
केरल उच्च न्यायालयने शुक्रवार, २३ जुलाईको उस याचिकाको निरस्त कर दिया है जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गकी भूमि अधिग्रहणमें चूक होनेके विषयमें स्पष्ट कहा गया था व उच्च न्यायालयसे इसमें हस्तक्षेपकी मांग की गई थी । कोल्लममें ‘राष्ट्रीय राजमार्ग-६६’के निर्माण कार्यके मध्यमें धार्मिक स्थलोंके आ जानेके कारण उनको बचानेके लिए जो याचिका प्रविष्ट की गई थी, उसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न्यायालयने स्पष्ट कहा कि वे चौडीकरणके इस कार्यमें वह हस्तक्षेप नहीं करेगा । न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णनने निर्णय देते हुए कहा कि यदि इस कार्यसे धार्मिक स्थल प्रभावित होते हैं तो भगवान हमें क्षमा कर देंगे । समाचारके अनुसार, मार्गके बाई ओर दो मन्दिर व एक मस्जिद है तथा दाईंओर एक निजी मस्जिद दृष्टिगत होती है । केरल शासनने इस निजी मस्जिदको बचानेके लिए अपने अधिकारोंका प्रयोग करते हुए चौडीकरणकी प्रक्रियामें परिवर्तन कर दिया, जिसके कारण अब दोनों मन्दिरोंकी ओर निर्माण कार्य आ गया है । वहीं केरल शासन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरणके अधिकारियोंका कहना है कि याचिकाकर्ताने जैसा बताया है, वैसा कुछ भी नहीं है और स्थानमें किसी भी प्रकारका परिवर्तन नहीं किया गया है ।
जब शासन ही हिन्दू विरोधियोंका है, तो नीतियां भी हिन्दू विरोधी ही होंगी, इसमें कोई संशय नहीं है । अब इस प्रकारके प्रकरण अन्य राज्योंमें भी होने आरम्भ न हो, इस हेतु सभी हिन्दू सङ्गठित होकर न्यायिक मार्गसे ऐसे कुशासनका विरोध करें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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