ईसाई युवती और मुसलमान युवकके विवाहको गिरिजाघरने घोषित किया अवैध, ऐसा करवानेवाले पादरियोंको भी दिया दण्ड


०३ जनवरी, २०२१
     केरलके सायरो मालाबार गिरिजाघरकी ३ सदस्योंवाली जांच समितिने कैथोलिक युवती और मुसलमान युवकके मध्य अन्तरधार्मिक विवाहको एक ‘गम्भीर त्रुटि’के कारण अवैध बता दिया है । समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’के अनुसार, यह घटना केरलकी है ।
समितिने अपने आदेशमें कहा कि विवाहके मध्य कई नियमोंका उल्लङ्घन हुआ है और इस विवाहके समय ‘कैनन कानून’का पालन नहीं किया गया; इसलिए विवाह अवैध है । दो पादरियोंने कई नियमोंका ध्यान नहीं रखा, अभी उन्हें भी प्रतिबन्धित किया जा चुका है । त्रिशूर जनपदके इरिनजलक्कुडाकी रहनेवाली कैथोलिक युवती और कोच्चिके रहनेवाले मुसलमान युवकका ९ नवंबरको विवाह हुआ ‌। थीइसके पहले भी सायरो मालाबार गिरिजाघर विवादोंमें रह चुका है । गिरिजाघरने कहा था कि वह स्वयं सुनिश्चित करेगा कि ईसाई समुदायमें होनेवाले विवाह ‘कैनन लॉ’के आधारपर ही होंगे । विवाद तब आरम्भ हुआ, जब कोच्चि स्थित कादवंथरा सेंट जोसेफ गिरिजाघरमें बिशपकी उपस्थितिमें एक मुसलमान व्यक्तिसे विवाह कर लिया । अगले दिन दम्पत्तिके चित्र समाचार पत्रोंमें प्रकाशित हुए, जिसके पश्चात केरलमें कैथोलिक समुदायके बडे भागने विरोध करना आरम्भ किया ।
       केरलमें पादरियोंने सबसे पहले लव जिहादका प्रकरण उठाया था, जिसके अन्तर्गत मुसलमान समुदायके युवक अन्य समुदायकी ‘गैर’मुसलमान महिलाओंको झूठे प्रेमजालमें फंसाते हैं और उनपर धर्म परिवर्तनका दबाव बनाते हैं ।
      केरलमें सर्वप्रथम हिन्दुओंका धर्मान्तरण ईसाई मिशनरियोंने किया, उस समय किसी भी सङ्गठनने विरोध नहीं किया था। परन्तु आज जब जिहादी अपने उद्देश्य ‘गजवा ए हिन्द’को लागू करनेके लिए ईसाई युवतियोंको लवजिहादमे फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, तो अब ईसाई मिशनरियोंको लगा कि यह धर्मान्तरणकी अग्नि उनके ही घरोंको जला रही है; इसलिए  वे इसके विरुद्ध स्वर उठा रहे हैं ।
       हिन्दुओ, आप अपनी भावी पीढीको धर्मशिक्षण देना आरम्भ करें, जिससे वे इनके चंगुलमें न आ सकें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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