केरलके ईसाई परिवर्तन केन्द्रमें ‘हाथ-पांव बांधकर महिलाओंको दिए जाते हैं ‘इंजेक्शंस’, दिखाते हैं अश्लील चलचित्र
२३ फरवरी, २०२१
केरलमें १९९० से कोट्टायम-एट्टुमन्नूर राजमार्गपर ईसाई मिशनरियोंद्वारा समलैंगिक, उभयलिंगी, ‘ट्रांसजेंडर’ और समलैंगिक पूछताछके अन्तर्गत ‘कन्वर्जन थेरेपी सेंटर्स’ (कन्वर्जन सेंटर्स) चलाए जा रहे हैं । अदिचिरा स्थित ‘विन्सेंटियन कॉन्ग्रिगेशन’द्वारा संचालित परित्राणा ‘रीट्रीट’ केन्द्रमें अलेक्स सहित ३० लोग प्रविष्ट थे ।
‘द न्यूज मिनट’में प्रकाशित सूचना अनुसार, अलेक्सको जब ज्ञात हुआ कि वह समलैंगिक है तो उसने स्वयंको ठीक करनेके लिए इस पुनर्वास केन्द्रसे सम्पर्क किया, जहां उसे २१ दिवसके ‘कोर्स’में पंजीकृत किया गया । उसे एक ‘बाइबल’, श्वेत वस्त्र और एक पुस्तक दी गई । २५००० रुपये देनेके पश्चात ‘रिट्रीट सेंटर’से बहुत दूर एकान्तमें ‘गे कन्वर्जन सेंटर’में भेजा गया, जहां १८ से २७ वर्ष आयुके कई पुरुष एवं महिलाएं थीं ।
पादरी स्वयंको ‘साइकेट्रिस्ट’ और ‘साइकोलॉजिस्ट’ बताते थे । उन सबका कहना था कि वह भी पूर्वमें ‘Gay’ थे, परन्तु अब जीससके मार्गपर चलकर ठीक हो गए हैं । सभीको प्रातः पौरुष बढानेवाला व्यायाम कराया जाता था, उसके पश्चात ‘प्राइवेट काउंसलिंग सेशंस’ होते थे, जहां उनसे उनकी यौन इच्छाओं और ‘सेक्स’के विषयमें प्रश्न पूछे जाते थे । साथ ही उन्हें ‘लेस्बियन पोर्न’ देखनेको कहा जाता था, जबकि ‘लेस्बियनों’को ‘गे पोर्न’ देखनेका निर्देश दिया जाता था । महिलाओंके हाथ-पांव बांधकर अचेत अवस्थामें कई ‘इंजेक्शंस’ दिए जाते थे ।
अलेक्सका कहना है कि इन सबके पश्चात भी वह और उसके साथ प्रविष्ट अन्य लोग ठीक नहीं हो पाए और सभी गहरी मानसिक प्रताडना और दबावसे रहते हुए कोई अपने माता-पिताकी हत्यामें कारावास चला गया, कुछ घरसे भाग निकले, कुछने आत्महत्या की । विशेषज्ञोंका कहना है कि इस प्रकारके परिवर्तन केन्द्र अवैध है ।
जिसका जितना गहन ज्ञान है, उसकी शिक्षा भी वैसी ही होगी । मानव मस्तिष्कको ठीक करनेके नामपर उल्टे-सीधे कृत्य करना यह पादरियोंसे अपेक्षित है; क्योंकि योग, ब्राह्मचर्य आदिका तो उनसे दूर-दूरतक लेना-देना नहीं है । इसीसे हिन्दू धर्मकी महानताका बोध होता है, जिसपर सभी हिन्दुओंने गर्व होना चाहिए और यह भान होना चाहिए कि ऐसा सतही ज्ञान देनेवाले धर्म नहीं, वरन धन अर्जन केन्द्र होते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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