जुलाई ११, २०१८
बीजेपी वर्षोंसे केरलमें राजनीतिक धरातल ढूंढ रही है । केन्द्रमें भाजपा शासन आनेके पश्चात इस अभियानको और गति दी गई है । भाजपाके निरन्तर बढते प्रभाव शको देखते हुए, केरलमें सत्तारूढ माकपाने नवीन रणनीतिपर विचार करना आरम्भकर दिया है । राज्य शासनने ‘श्रीकृष्ण जयन्ती महोत्सव’का (कृष्ण जन्माष्टमी) आयोजन करनेके पश्चात अब ‘रामायण माह’ मनानेका निर्णय किया है । १७ जुलाईसे मलयालम कैलेण्डररके अनुसार अन्तिम महीना आरम्भ होने जा रहा है । यह १६ अगस्ततक रहेगा । मलयालम संस्कृतिमें इस माहको ‘कारकिदक्कम’के रूपमें जाना जाता है । ‘कारकिदक्कम’में मानसून अन्तिम चरणमें पहुंच जाता है । ऐसा माना जाता है कि इस अवधिमें मानवकी रोग प्रतिरोधक क्षमता दुर्बल हो जाती है, जिसके कारण उनकी क्षमताओंमें न्यूनता आती है । इसे देखते हुए लोग शामके समय अपने घरों और मन्दिरोंमें रामायणका पाठ करते हैं । इस माहके समय लोग आयुर्वेद चिकित्सा भी कराते हैं । मान्यताओंपर विश्वास करें तो इससे मानवका शरीर और दिमाग पुनः शुद्ध हो जाते हैं ।
केरलमें सत्तारूढ माकपा ‘कारकिदक्कम’ माहका प्रयोग लोगोंतक पहुंचनेके प्रयासमें जुटी है । इस अवधिको ‘रामायण माह’के रूपमें मनानेका प्रारूप तैयार करते हुए दलने इस अवसरपर कई कार्यक्रम आयोजित करनेकी योजना बनाई है । माकपाने इसके अन्तर्गत पार्टी कैडरोंको रामायणके उपदेशोंसे अवगत करानेका निर्णय किया है। इसके लिए संस्कृत भाषाके विद्वानोंकी सेवा ली जाएगी । योजनाके अन्तर्गत २५ जुलाईको राज्यस्तरीय सम्मेलनका आयोजन किया जाएगा । माकपाके इस पगको हिन्दू समुदायको लुभानेके प्रयासके रूपमें देखा जा रहा है । केरलमें राजनीतिक धरातल ढूंढ रही भाजपा हिन्दुत्वके नामपर पैठ बनानेका प्रयास कर रही है । माकपाने भाजपाके इस प्रयासको विफल करनेके लिए रामायण माह मनानेका निर्णय किया है । माकपा बहुसंख्यक समुदायको भाजपाकी ओर जानेसे रोकनेका प्रयास कर रही है । बता दें कि वर्ष २०१९ में लोकसभाके चुनाव होने वाले हैं । इसे देखते हुए भाजपाके शीर्ष नेतृत्वकी दृष्टि दक्षिण भारतीय राज्योंपर है । इसमें केरल सबसे महत्वपूर्ण है । भाजपाके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पूर्वमें बहुत बार केरलका भ्रमण कर चुके हैं ।
स्रोत : जनसत्ता
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