खरा साधकत्व जीवनमें विषम स्थिति आनेपर ही ज्ञात होता है!


अध्यात्मके सिद्धान्तोंको अपने जीवनमें उतारनेपर, वृद्धावस्था, अपने निकटके परिजनकी अकाल मृत्यु एवं महामारीमें भी मन स्थिर और शांत रहता है, यही अध्यात्म व साधनाका महत्त्व है । अपने मनके अनुसार  साधना करनेसे हम स्वयंको साधक या भक्त समझ सकते हैं; किन्तु खरा साधकत्व जब जीवनमें विषम स्थिति आती है तो ही ज्ञात होता है और जीवनमें गुरु होनेका भी महत्त्व तभी ज्ञात होता है ।



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