खीरेके औषधीय गुण


 
खीराकी (त्रपुश, कंटकी फल) मूल उत्पत्ति भारतमें मानी जाती है, पश्चिम एशियामें ३००० वर्षोंसे इसकी खेतीकी जाती है । भारतसे यह ग्रीस और इटलीमें फैल गया और तत्पश्चात चीनमें फैल गया । आयुर्वेदके अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, दाहपित्त तथा रक्तपित्त दूर करनेवाला रक्त विकारनाशक है । खीरा व ककडी एक ही प्रजातिके फल हैं। कम वसा(फैट) व कैलोरीसे भरपूर खीरेका सेवन आपको कई गंभीर रोगोंसे बचानेमें सहायक है । खीरेमें इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीनको पचानेमें सहायता करता है । खीरा जलका बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसमें ९६ % जल होता है। खीरेमें विटामिन ए, बी1, बी6, सी, डी, पौटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि प्रचुर मात्रामें पाये जाते हैं । आज हम आपको खीरेके कुछ औषधीय गुणोंके विषयमें बताने जा रहे हैं:
• बालों व त्वचाके लिए – खीरेमें सिलिकन व सल्फर बालोंको बढनेमें सहायता करते हैं । अच्छे परिणामके लिए आप चाहें तो खीरेके रसको गाजर व पालकके रसके साथ भी मिलाकर ले सकते हैं । खीरा त्वचाकी धूपसे झुलसनेसे (सनबर्नसे) रक्षा करता है । खीरेमें विद्यमान एस्कोरबिक एसिड व कैफीक एसिड जलकी न्यूनताको (जिसके कारण आंखोंके नीचे सूजन आने लगती है ) न्यून करता है ।
• मूत्ररोग – 10 ग्राम खीरेके बीजको पीसकर पानीमें मिलाकर दिनमें 2 से 3 बार पीनेसे नाभिका दर्द और मूत्राशयकी वेदना ठीक होती है ।
• यकृत(लिवर)का बढना – खीरेको काटकर नींबू व पुदीनेका रस एवं काला नमक मिलाकर खानेसे लिवरका बढनेका रोग ठीक होता है ।
• मूर्च्छा – खीरेको काटकर रोगीकी आंखों और माथेपर रखने और खीरेकी फांक रोगीको सुंघानेसे मूर्च्छा दूर होती है ।
• सिरकी वेदना – गर्मीके कारण यदि सिरमें वेदना हो रही हो तो खीरेको गोलाईमें काटकर दो टुकडे कर दोनों नेत्रोंपर रखे, इससे गर्मीमें आराम मिलेगा और मानसिक तनाव दूर होगा, अधिक गर्मी होनेपर खीरेको पीसकर लेप बनाकर माथेपर लगाकर १५ मिनटके लिए लेट जाएं, गर्मीमें आराम मिलेगा |
• कर्करोगसे (कैंसरसे) रक्षा – खीरेके नियमित सेवनसे कैंसरका संकट न्यून होता है। खीरेमें साइकोइसोलएरीक्रिस्नोल, लैरीक्रिस्नोल और पाइनोरिस्नोल तत्व होते हैं । ये तत्व सभी प्रकारके कर्करोग जिनमें स्तनके कर्करोग भी आते हैं उनको रोकनेमें सक्षम है ।
• मासिक धर्ममें लाभप्रद – खीरेका नियमित सेवनसे मासिक धर्ममें होनेवाले कष्ट दूर होते हैं। लड़कियोंको मासिक धर्मके समय बहुत कष्टमें होती हैं, वो दहीमें खीरेको कसकर उसमें पुदीना, काला नमक, काली मिर्च, जीरा और हींग डालकर रायता बनाकर खाएं इससे मासिक धर्मका कष्ट दूर होगा ।
• मधुमेह व रक्तचापमें लाभप्रद – मधुमेह व रक्तचापसे बचनेके लिए नियमित रुपसे खीरेका सेवन लाभकारी हो सकता है । खीरेके रसमें वो तत्व हैं जो अग्न्याशय(पैनक्रियाज)को सक्रिय करते हैं । अग्न्याशय सक्रिय होनेपर शरीरमें इंसुलिन बनती है। इंसुलिन शरीरमें बननेपर मधुमेहसे लडनेमें सहायता मिलती है। खीरा खानेसे कोलस्ट्रोलका स्तर कम होता है । इससे हृदय संबंधी रोग होनेकी आशंका अल्प रहती है। खीरामें फाइबर, पोटैशियम और मैगनीशियम होता है जो रक्तचाप(ब्लड प्रेशर) अच्छा रखनेमें अहम भूमिका निभाते हैं । खीरा उच्च और निम्न रक्तचाप दोनोंमें ही एक प्रकारसे औषधिका कार्य करता है ।
• भार(वजन) न्यून करनेमें सहायक – जो लोग अपना भार घटाना करना चाहते हैं, उन लोगोंके लिए खीरेका सेवन अत्यधिक लाभकारी रहता है । खीरेमें जल अधिक और कैलोरी अल्प होती है, इसलिए भार घटानाके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है । जब भी भूख लगे तो खीरेका सेवन अच्छा हो सकता है । सूप और सलादमें खीरा खाएं । खीरेमें रेशा (फाइबर) होते हैं जो भोजन पचानेमें सहायक होते हैं।
• मुंहके गंधको दूर करता है – अगर मुंहसे गंध आ रही है तो कुछ मिनटोंके लिए मुंहमें खीरेका टुकडा रख लें; क्योंकि यह जीवाणुओंको मारकर धीरे-धीरे दुर्गन्धके प्रमाणको घटा देता है । आयुर्वेदके अनुसार पेटमें गर्मी होनेके कारण मुंहसे दुर्गन्ध निकलता है, खीरा पेटको शीतलता प्रदान करनेमें सहायता करता है ।
• आंखोंके लिए लाभकारी – मुखपर लेप या उबटन लगानेके पश्चात आंखोंकी जलनसे बचनेके लिए खीरेको गोलाइमें काटकर आंखोंकी पलकके ऊपर रखते हैं। इससे आंखोंको ठंडक मिलती है । खीरेकी तासीर जलन कम करनेकी होती है। ऐसा हम कभी भी कर सकते हैं। जब भी आंखोंमें जलन अनुभव हो तो आप खीरेकी सहायता ले सकते हैं।
• विटामिनके (K) का अच्छा माध्यम – खीरेके छिलकेमें विटामिन-के पर्याप्त मात्रामें मिलता है | ये विटामिन प्रोटीनको सक्रिय करनेका कार्य करता है फलस्वरूप कोशिकाओंके विकासमें सहायता मिलती है, साथ ही इससे रक्तका थक्का (ब्लड-क्लॉटिंग) जमनेकी समस्या भी पनपने नहीं पाती है ।
• मसूडे स्वस्थ रखता है – खीरा खानेसे मसूडोंके रोग अल्प होते हैं। खीरेके एक टुकडेको जीभसे मुंहके ऊपरी भागपर आधा मिनिट तक रोकें । ऐसेमें खीरेसे निकलनेवाला फाइटोकैमिकल मुंहकी दुर्गंधको समाप्त करता है ।
• त्वचाके लिए – प्रशिक्षण(टैनिंग) और धूपसे झुलसने(सनबर्न)में भी खीरेके छिलकेका प्रयोग लाभकारी होता है | इससे त्वचाका रूखापन भी कम होता है और नमी बनी रहती है | खीरा काटनेके पश्चात आप उसके छिलकेको हल्के हाथोंसे लगा सकती हैं | कई लोग इसके छिलकेको सुखाकर पीस लेते हैं और उसमें गुलाबजलकी बूंदें मिलाकर मुखके लेप हेतु प्रयोग करते हैं ।
• जोडोकी दवा – खीरेमें सीलिशिया प्रचुर मात्रामें होता है । इससे जोड सशक्त होते हैं और ऊतक (टिशू) परस्पर पुष्ट होते हैं । गाजर और खीरेका रस मिलाकर पीनेपर गठिया या वात रोगमें सहायता मिलती है । इससे यूरिक एसिडका स्तर भी न्यून होता है । खीरेका सेवन घुटनोंकी वेदनाको भी दूर भगाता है । घुटनोंके वेदनावाले व्यक्तिको खीरे अधिक खाने चाहिए तथा साथमें एक लहसुनकी कली भी खा लेनी चाहिये।
• पथरी – पथरीके रोगीको खीरेका रस दिनमें दो-तीन बार अवश्य पीना चाहिये। इससे पेशाबमें होनेवाली जलन व अवरोध दूर होता है ।
• बुखार – ताजे खीरेको काटकर तलवेपर रगडें और सिरपर ठंडी पट्टी रखें, ज्वररकी तपन शान्त हो जाएगी ।
• प्रतिरोधक शक्ति बढाने में – हमारे शरीरमें हानिकारक मुक्तकणोंके संचयसे कई प्रकारकके असाध्य रोग हो सकते हैं, वास्तवमें मुक्त कणोंकी कारण तनाव, कैंसर, हृदय रोग, फेफडेके रोग होनेका संकट बढ जाता है । इन सबसे बचनेके लिए एंटीऑक्सीडेंटकी आवश्यकता होती है, फल और सब्जियां, खीरे सहित, विशेष रूपसे लाभप्रद एंटीऑक्सीडेंटमें प्रचुर मात्रामें होती हैं जो इन स्थितियोंको कम कर सकती हैं ।
खीरेमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जिसमें फ्लेवोनोइड और टैनिन होता है, जो हानिकारक मुक्त कणोंके संचयको रोकते हैं और असाध्य रोगके प्रभावको घटा सकते हैं । इसलिए आप स्वयंको इन रोगोंसे बचानेके लिए खीरेका सेवन जरूर करें।
• पाचनके लिए लाभप्रद – खीरेके छिलकेमें ऐसे फाइबर होते हैं जो घुलते नहीं है | ये फाइबर पेटके लिए संजीवनी बूटीके समान कार्य करता है| कब्जकी समस्याको दूर करते हैं |
खीरेका उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी ध्यानमें रखें :
• खीरा कभी भी काटकर बासी न खाएं ।
• खीरेका प्रयोग शरीरमें कफको बढाता है; इसलिए कफके रोगी इसे नियंत्रित मात्रामें प्रातःकाल और ग्रीष्म ऋतुमें ही लें ।
• खीरेका सेवन रात्रिमें न करें। जहां तक हो सके, दिनमें ही इसे खाएं ।
• खीरेके सेवनके पश्चात जल तुरन्त ग्रहण न करें।
 


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