कुम्भमें शंकराचार्यका अपमान, गन्दगीके निकट कम भूमि प्रदान की, शंकराचार्यजी करेंगें कुम्भका बहिष्कार !!


दिसम्बर १२, २०१८

कुम्भ मेलेसे पूर्व अखाडों और खाक चौकके सन्तोंका विरोध शासनने भले ही दूर कर लिया हो, किन्तु उडीसा स्थित पुरी पीठके शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीने २०१९ में प्रयागराजमें लगने जा रहे कुम्भ मेलेमें शिविर न लगानेका निर्णय लिया है । सरकार और प्रशासनसे क्रुद्ध शंकराचार्यने कहा कि वह अपने झूसी स्थित आश्रममें ही रुककर महत्वपूर्ण तिथियोंपर स्नान करेंगे; क्योंकि प्रयागराजका अपमान वह नहीं कर सकते ।

योगी आदित्यनाथ शासन और स्थानीय प्रशासनपर अपनी उपेक्षाका आरोप लगाते हुए शंकराचार्यजीने कहा, ‘इतनी उपेक्षा तो उनकी दूसरी दलोंके शासनमें भी नहीं हुई ! प्रयाग कुम्भका आयोजन पुरी पीठके अन्तर्गत किया जाता है, इसके पश्चात भी न तो हमें पदके अनुरूप भूमि दी गई, न ही सुविधाएं ! हमें एक तो अल्प भूमि दी गई, दूसरे ऐसे स्थानपर दी गई, जहां मेलेकी गंदगी बहाई जा रही है ! यह मेरा और मेरे पदका अपमान है !’

शंकराचार्यने कहा कि जो किसी राजनैतिक दलसे जुडे सन्त हैं, उन्हें ही महत्व दिया जाता रहा है, इस बार भी ऐसा ही किया गया । अखाडोंको बडी भूमि और सुविधाएं दे दी गईं, जबकि जिस शंकराचार्यके अन्तर्गत अखाडे उनकी सेनाके रूपमें प्रतिष्ठित किए गए, उन्हें ऐसी भूमि दी गई जहां २०० लोगोंको भी नहीं ठहराया जा सकता, जबकि उनके शिविरमें देश ही नहीं विश्व भरसे लोग आते हैं । बताया गया कि कुछ माह पूर्व ही योगी आदित्यनाथने कुम्भसे जुडी एक स्मारिकाका उनसे विमोचन करवाया था और मेलेसे जुडे अधिकारी भी उनसे मिले थे । इसके पश्चात भी उनके लिए एक सम्मानजनक भूमि नहीं उपलब्ध कराई गई । जहां उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई है, वहां शौचालय लगा दिए गए हैं और नाला भी बह रहा है !! उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि यह सब योजनाबद्ध ढंगसे किया गया, जिससे हम शिविर न लगा सकें । मेलेमें सबसे प्रथम नियमानुसार शंकराचार्यको भूमि आवंटित की जानी चाहिए । इसके पश्चात अखाडे, तत्पश्चात दूसरे सन्तोंको भूमि दी जानी चाहिए, परन्तु मेला प्रशासनने मनमाने ढंगसे भूमिका आवंटन किया ।’

 

“धर्मरक्षण हेतु शंकराचार्यके लिए ही अखाडे रूपी सेना तैयार की गई थी और उन्हीं अखाडों व अन्य शासकगणद्वारा शंकराचार्यजीकी अव्हेलना, सबके लिए लज्जाका विषय है । आज कोई अपने धर्मका पालन नहीं कर रहा है, न ही कोई अखाडे रूपी सेना धर्मरक्षण हेतु तत्पर है, जिसके लिए आदिगुरुने इनकी स्थापना की थी । सभी ध्येयसे भटक मनमाना आचरण कर रहे हैं, अन्यथा शंकराचार्यजीका ऐसा अपमान क्यों होता ? शंकराचार्यजीसे क्षमा प्रार्थना कर उन्हें अपेक्षित चीजें ससम्मान उपलब्ध करवाएं, ऐसी हिन्दुवादी शासनसे अपेक्षा है ।- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : नभाटा



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution