क्यों हैं हमारे श्रीगुरु ‘श्रीकृष्ण स्वरुप’ ? (भाग- ५)


‘योगी’ भी भगवान श्रीकृष्णका एक है नाम योगका अर्थ है ईश्वरसे अनुसन्धान और जो सतत उस अनुसन्धानमें रहे, वह योगी कहलानेका खरा अधिकारी होता है । श्रीगुरुके पूर्ण योगी होनेमें उनके किसी भी साधकको संशय नहीं है और आज तो उनके देहमें इतने दैवी परिवर्तन आ चुके हैं कि वे स्वयं उनके योगी होनेके तथ्यकी पुष्टि करते हैं । उनके छायाचित्रमें, उनकेद्वारा उपयोग कि जानेवाले वस्तुओंमें, उनके कक्षमें यहांतक कि उनके आश्रमोंमें एवं उनके साधकोंमें दिव्य परिवर्तन उनकी अलौकिकताका वर्णन करते हैं । खरे योगी अपने योगके बलपर सम्पूर्ण ब्रह्माण्डमें राज्य करते हैं और हमारे श्रीगुरु ऐसे ही एक योगी हैं जिनकी स्तुति ऋषि-मुनि भिन्न माध्यमोंसे करने लगे हैं ।



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