क्यों करें अखण्ड नामस्मरण ? (भाग – २०)


ईश्वरका नाम मोक्षप्राप्तिका सर्वश्रेष्ठ साधन है, रत्नाकर दस्यु इसी नामके प्रभावसे वाल्मीकि ऋषि बने । इस सृष्टिके इतिहासमें ऐसे अनेक भक्त हुए हैं जो नामस्मरण कर इस भवसागरको पार कर गए ।  नामकी तुलना किसीसे भी नहीं की जा सकती है; इसकी महिमाका गुणगान जितना भी किया जाए वह कम ही होगा, इसलिए नामकी महिमाका गुणगान हमारे धर्मशास्त्रोंमें कुछ इसप्रकारसे किया गया है –                               

न नामसदृशं ज्ञानं न नामसदृशं व्रतम् । न नामसदृशं ध्यानं न नामसदृशं फलम् ।।

न नामसदृशस्त्यागो न नामसदृशः शमः । न नामसदृशं पुण्यं न नामसदृशी गतिः ।।   

नामैव परमा मुक्तिर्नामैव परमा गतिः । नामैव परमा शान्तिर्नामैव परमा स्थितिः ।।   

नामैव परमा भक्तिर्नामैव परमा मतिः । नामैव परमा प्रीतिर्नामैव परमा स्मृतिः ।।   

        अर्थ : नामके समान न ज्ञान है, न व्रत है, न ध्यान है, न फल है, न दान है, न शम है, न पुण्य है और न कोई आश्रय है । नाम ही परम मुक्ति है, नाम ही परमगति है, नाम ही परमशान्ति है, नाम ही परमनिष्ठा है, नाम ही परमभक्ति है, नाम ही परमबुद्धि है, नाम ही परमप्रीति है, नाम ही परमस्मृति है; अतः नामजप करें !



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