क्यों सीखें संस्कृत ? (भाग – ९)


इसके सुस्पष्ट व्याकरण एवं वर्णमालाकी वैज्ञानिकताके कारण इसकी सर्वश्रेष्ठता स्वयं सिद्ध है । नासाका कहना है कि छठी और सातवीं पीढीके ‘सुपर कम्प्यूटर’ संस्कृत भाषापर आधारित होंगे ।
एक प्रकाशित वृत्तके अनुसार, नासाके वैज्ञानिक रिकब्रिग्सने १९८५  में भारतसे संस्कृतके एक सहस्र प्रकाण्ड विद्वानोंको बुलाया था । उन्हें नासामें चाकरीका (नौकरीका) प्रस्ताव दिया था । उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है, जिसमें सूत्रके रूपमें संगणकके (कम्प्यूटरके) माध्यमसे कोई भी संदेश कमसे कम शब्दोंमें भेजा जा सकता है । विदेशी उपयोगमें अपनी भाषाकी मदद देनेसे उन विद्वानोंने अस्वीकार कर दिया था ।
इसके पश्चात कई अन्य वैज्ञानिक पहलू समझते हुए अमेरिकाने वहां नर्सरी क्लाससे ही बच्चोंको संस्कृतकी शिक्षा आरम्भ कर दी है । नासाके ‘मिशन संस्कृत’की पुष्टि उसका जालस्थल (वेबसाइट) भी करता है । उसमें स्पष्ट लिखा है कि २० वर्षोंसे नासा संस्कृतपर अत्यधिक धन और श्रम व्यय कर चुकी है । साथ ही, इसमें इसका भी उल्लेख है कि संस्कृत भाषा कम्प्यूटर प्रयोगके लिए सर्वश्रेष्ठ भाषा है ।

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कैसे सीखें संस्कृत ?
विद्यालयीन पाठ्यक्रमोंमें बारहवीं तककी पुस्तकोंका प्रथम अभ्यास करें, तत्पश्चात ‘लघुसिद्धान्तकौमुदी’ जैसे ग्रन्थोंका अभ्यास आरम्भ करें ! किसी भी भाषाका प्राण उसका व्याकरण होता है और संस्कृतका व्याकरण एक दर्शन है, आप जितना सूक्ष्मतासे इसका अभ्यास करेंगे, यह उतना ही आपको आनन्द प्रदान करेगा । प्रतिदिन मात्र एक घण्टा इसके अभ्यास हेतु निकालनेकी आवश्यकता है । साथ ही ‘यूट्यूब’की भी सहायता ले सकते हैं; किन्तु सदैव संस्कृत सीखने हेतु प्रथम व्याकरणसे उसका अभ्यास आरम्भ करें !



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